AMBIKAPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक निजी अस्पताल की फार्मेसी से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। सिद्धार्थ हॉस्पिटल में करीब साढ़े तीन साल के बच्चे को कथित तौर पर एक्सपायरी हो चुका Amikacin 250 mg Injection लगाए जाने की शिकायत की गई है। बच्चे के पिता ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और नर्सिंग होम एक्ट की टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान अस्पताल की फार्मेसी में एक्सपायरी दवाएं मिलने की बात सामने आई। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर फार्मेसी को 15 दिनों के लिए सील कर दिया गया है।

बच्चे की तबीयत खराब होने पर अस्पताल पहुंचे थे पिता
जानकारी के मुताबिक, लखनपुर निवासी शम्स खान अपने करीब साढ़े तीन साल के बेटे उमैर खान की तबीयत खराब होने पर 6 सितंबर को इलाज के लिए रामानुजगंज रोड स्थित सिद्धार्थ हॉस्पिटल पहुंचे थे। पिता के अनुसार, डॉक्टर ने बच्चे की जांच के लिए कुछ टेस्ट लिखे। रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल में ही बच्चे का उपचार शुरू किया गया और उसे Amikacin 250 mg Injection लगाया गया। शम्स खान का आरोप है कि उपचार के दौरान फार्मेसी से एक और इंजेक्शन दिया गया, जिसे अगले दिन लगाने के लिए कहा गया। इसके बाद वह बच्चे को लेकर घर चले गए।

इंजेक्शन की शीशी देखकर पिता के उड़े होश
शिकायतकर्ता के मुताबिक, अगले दिन जब उन्होंने इंजेक्शन की शीशी को ध्यान से देखा तो उस पर निर्माण तिथि मई 2024 और एक्सपायरी अप्रैल 2026 दर्ज थी। पिता का आरोप है कि 6 सितंबर 2026 को बच्चे के इलाज में जिस इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया, उसकी एक्सपायरी करीब दो महीने पहले ही हो चुकी थी। शम्स खान का कहना है कि घर लौटने के बाद बच्चा सुस्त नजर आया और बार-बार नींद में जा रहा था। हालांकि, फिलहाल बच्चे की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।

पिता ने मेडिकल रिकॉर्ड और CCTV सुरक्षित रखने की मांग की
मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चे के पिता ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, इंजेक्शन एडमिनिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, नर्सिंग रिकॉर्ड और फार्मेसी स्टॉक रजिस्टर की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने 6 सितंबर के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने की भी मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चे को कौन-सी दवा दी गई और इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच के लिए अस्पताल पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
शिकायत के बाद नर्सिंग होम एक्ट की टीम और स्वास्थ्य विभाग का अमला सिद्धार्थ हॉस्पिटल पहुंचा। टीम ने अस्पताल की फार्मेसी और दवाओं के स्टॉक की जांच की। जांच के दौरान फार्मेसी में एक्सपायरी दवाएं मिलने की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने फार्मेसी को 15 दिनों के लिए सील कर दिया। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि एक्सपायरी दवा अस्पताल की फार्मेसी के स्टॉक में कैसे पहुंची और मरीज को दवा देने से पहले उसकी एक्सपायरी की जांच क्यों नहीं की गई।
सप्लायर से लेकर दवा देने तक होगी जांच
प्रशासन अब यह भी पता लगाएगा कि संबंधित इंजेक्शन और अन्य दवाएं किस सप्लायर से खरीदी गई थीं। साथ ही फार्मेसी के स्टॉक रिकॉर्ड, दवा की खरीद-बिक्री और मरीज के उपचार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि बच्चे को इंजेक्शन किसकी निगरानी में लगाया गया था और दवा की एक्सपायरी की जांच की गई थी या नहीं। कलेक्टर ने कहा है कि जांच में यदि डॉक्टर, नर्स, फार्मेसी कर्मचारी या किसी अन्य संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



































