RASHIFAL AND PANCHANG. 07 सितंबर 2026, सोमवार को विक्रम संवत 2083 सिद्धार्थि संवत्सर और शक संवत 1948 में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। शास्त्रों में इसे अजा या जया एकादशी के नाम से जाना जाता है और यह जन्माष्टमी के ठीक बाद पड़ने वाली सबसे पुण्यदायी एकादशी मानी जाती है। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र शाम 06:15 तक और सर्वार्थ सिद्धि व यायिजय योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। चंद्रमा मिथुन से कर्क में प्रवेश करेगा। आइए जानते हैं इसी संवत् के अनुसार पूरा पंचांग और 12 राशियों का फल।

7 सितंबर 2026 का पंचांग
दिनांक: 07 September 2026, सोमवार
संवत्: विक्रम संवत 2083, सिद्धार्थि (रौद्र), शक 1948, अयन सौम्यायनम्, गोल याम्य, ऋतु वर्षा
तिथि: भाद्रपद कृष्ण एकादशी 17:05 तक, फिर द्वादशी
एकादशी नाम: अजा / जया एकादशी – जन्माष्टमी बाद वाली ग्यारस, स्मार्त-वैष्णव दोनों के लिए मान्य
नक्षत्र: पुनर्वसु 18:15 तक, फिर पुष्य
योग: व्यतिपात 06:41 तक, फिर वरियान + सर्वार्थ सिद्धि + यायिजय योग
करण: बव 06:17 तक, फिर बालव 17:05 तक, फिर कौलव
चंद्र: मिथुन 12:39 PM तक, फिर कर्क
सूर्य: सिंह राशि, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र

शुभ-अशुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त: विजय मुहूर्त 12:24 – 12:48 PM
राहुकाल: 07:58 – 09:31 AM (अशुभ)

7 सितंबर 2026 का राशिफल
मेष: पुनर्वसु में चंद्रमा से रुके काम बनेंगे, गुरुजनों की सलाह से लाभ।
वृषभ: कर्क चंद्रमा में आते ही खर्च कम होगा, पारिवारिक सुख।
मिथुन: सुबह तक आपकी राशि में चंद्रमा – आत्मविश्वास हाई, फिर धन लाभ।
कर्क: दोपहर बाद आपकी राशि में चंद्रमा – मान-सम्मान, नया काम शुरू करने का योग।

सिंह: सिंह में सूर्य + एकादशी व्रत से सरकारी कार्य सिद्ध होंगे।
कन्या: सर्वार्थ सिद्धि योग में निवेश से लाभ, व्रत से मानसिक शांति।
तुला: बिजनेस पार्टनर से सहयोग, उधारी वसूली होगी।
वृश्चिक: अजा एकादशी पर दान से पितृ दोष शांत, आर्थिक मजबूती।
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धनु: धर्म-कर्म में रुचि, यात्रा का योग।
मकर: सिद्धार्थि संवत् में शनि की दृष्टि से कार्य में विलंब पर सफलता पक्की।
कुंभ: व्यतिपात योग में जल्दबाजी से बचें, शाम तक स्थिति अनुकूल।
मीन: एकादशी व्रत से लव लाइफ और सेहत दोनों में सुधार।


































