जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से पूरे सिस्टम को गुमराह किया। कूटरचित प्रमाण पत्र तैयार किए गए, बिना समुचित जांच के ऋण स्वीकृत कराए गए और बाद में उपयोगिता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए। इस तरह सुनियोजित तरीके से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। Read More










































































