मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे और विरोध शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि ऑपरेशन के अगले दिन जब सत्यकुमार को खांसी और सांस लेने में परेशानी हुई, तब स्टाफ को कई बार सूचना दी गई, लेकिन 4-5 घंटे तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं पहुंचा। Read More












































































