BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी के खिलाफ हुई विभागीय जांच और बर्खास्तगी से जुड़े दस्तावेज उसे RTI के तहत दिए जा सकते हैं, खासकर जब वह इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अपने बचाव के लिए करना चाहता हो।

जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच ने मामले में जांजगीर-चांपा फैमिली कोर्ट के जनसूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय अधिकारी और छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के आदेशों को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने संबंधित जनसूचना अधिकारी को निर्देश दिया कि निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद याचिकाकर्ता को 30 दिनों के भीतर मांगी गई जानकारी और नोटशीट उपलब्ध कराई जाए।

बर्खास्तगी के बाद उठाया RTI का सहारा
मामला जांजगीर-चांपा फैमिली कोर्ट में ड्राइवर के पद पर कार्यरत अकरम खान से जुड़ा है। उनके खिलाफ कथित कदाचार के आरोपों में दो विभागीय जांच शुरू की गई थीं। जांच पूरी होने के बाद प्रधान न्यायाधीश ने 5 जनवरी 2021 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।
अकरम खान का कहना था कि विभागीय जांच और बर्खास्तगी की कार्रवाई के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने तथा प्रभावी बचाव के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद उन्होंने RTI के जरिए पूरी नोटशीट और विभागीय जांच से संबंधित दस्तावेज मांगे।

तीनों स्तरों पर नहीं मिली जानकारी
जानकारी के लिए दाखिल आवेदन पर जनसूचना अधिकारी ने 15 जनवरी 2021, प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 10 मार्च 2021 और राज्य सूचना आयोग ने 28 जनवरी 2022 को राहत नहीं दी। अधिकारियों ने RTI एक्ट की धारा 8(1)(सी) और 8(1)(जे) का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया।
इसके बाद अकरम खान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने कहा- अपने ही मामले की जानकारी मांगना अधिकार
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता ने जिस सूचना की मांग की है, वह उसी के खिलाफ हुई विभागीय कार्रवाई और बर्खास्तगी से संबंधित है। इसे किसी तीसरे पक्ष की गोपनीय या निजी जानकारी नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी को अपने खिलाफ पारित आदेश के विरुद्ध उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रभावी बचाव और अपील का अधिकार है। ऐसे में अपने ही विभागीय मामले से जुड़े दस्तावेज हासिल करना उसके वैध अधिकार के दायरे में आता है।

निजता की दलील पर भी कोर्ट ने जताई असहमति
हाईकोर्ट ने माना कि RTI की धारा 8(1)(जे) के तहत निजता का हवाला देकर ऐसी जानकारी रोकी नहीं जा सकती, जब मांगी गई सूचना सीधे तौर पर याचिकाकर्ता की अपनी विभागीय कार्रवाई से जुड़ी हो।
कोर्ट के इस फैसले के बाद विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहे कर्मचारियों के लिए यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब संबंधित कर्मचारी अपने बचाव और कानूनी कार्रवाई के लिए अपनी विभागीय जांच से जुड़े दस्तावेज RTI के माध्यम से मांग सकेंगे, बशर्ते सूचना कानून के तहत कोई अन्य वैध अपवाद लागू न हो।





































