RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय से जुड़ा एक मामला विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। वर्ष 2023 में पुलिस विभाग की मिनी बस की टक्कर से दो युवकों की मौत के मामले में अदालत द्वारा तय मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर कोरबा की मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण अदालत ने पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोरबा पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है।

मामला 27 सितंबर 2023 का है। रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र में पिपरिया-परपोड़ी मुख्य मार्ग पर पुलिस विभाग की मिनी बस VIP ड्यूटी में तैनात थी। इसी दौरान बस की बाइक सवार दो युवकों से जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में बैजनाथ कंवर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल रवि यादव ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
DGP के नाम पंजीकृत था वाहन
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर कोरबा स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में अलग-अलग प्रकरण दायर किए। मामले की सुनवाई प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा में हुई।

पीठासीन अधिकारी गरिमा शर्मा ने 14 जनवरी 2026 को दोनों मामलों में फैसला सुनाया। अदालत ने हादसे के लिए मिनी बस चालक की लापरवाही को जिम्मेदार माना। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ के नाम पर पंजीकृत था और हादसे के समय वाहन का बीमा भी समाप्त हो चुका था।
इसी आधार पर DGP और कोरबा SP को मामले में पक्षकार बनाया गया।
26.09 लाख रुपये मुआवजे का आदेश
अदालत ने मृतक बैजनाथ कंवर के आश्रितों को 26 लाख 9 हजार 200 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही मुआवजा राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी निर्देश दिए गए। अदालत ने स्पष्ट किया था कि आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर मुआवजा राशि पीड़ित परिवार को उपलब्ध कराई जाए।
हालांकि, पीड़ित पक्ष के मुताबिक निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया। आदेश के बाद पांच महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद राशि नहीं मिलने पर मृतकों के परिजनों को दोबारा अदालत का रुख करना पड़ा।

आदेश की जानकारी के बावजूद भुगतान नहीं होने का आरोप
पीड़ित पक्ष का कहना है कि अदालत के आदेश की जानकारी पुलिस महानिदेशक कार्यालय को भी दी गई थी। इसके बावजूद मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से राशि की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
DGP और SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने के निर्देश
मुआवजा राशि का भुगतान नहीं होने पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा ने सख्त रुख अपनाते हुए DGP और कोरबा SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है।
अदालत के इस आदेश से पुलिस विभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर वाहन के बीमा की वैधता समाप्त होने के बावजूद उसके संचालन और अदालत के आदेश के समय पर अनुपालन नहीं किए जाने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

उठ रहे कई सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वाहन पुलिस विभाग के नाम पर पंजीकृत था और VIP ड्यूटी में इस्तेमाल हो रहा था, तो बीमा समाप्त होने के बावजूद उसका संचालन कैसे जारी रहा। दूसरा सवाल अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद मुआवजा राशि का समय पर भुगतान नहीं किए जाने को लेकर है।
अब अदालत द्वारा DGP और SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने के निर्देश के बाद यह मामला पुलिस विभाग के लिए गंभीर प्रशासनिक और कानूनी चुनौती बन गया है।





































