BILASPUR NEWS. मवेशियों की तस्करी और उन्हें कत्लखाने ले जाने के मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस द्वारा जब्त किए गए कृषि उपयोगी पशुओं को ट्रायल पूरा होने तक आरोपी, वाहन चालक या कथित मालिक को सुपुर्दनामा पर नहीं सौंपा जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे सभी मवेशी केवल पंजीकृत गौशालाओं, गोसदनों या गोरक्षण संस्थानों की देखरेख में ही रहेंगे।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि यदि पशु तस्करी के आरोपियों को ही जब्त मवेशी वापस सौंप दिए जाएं, तो छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 बनाने का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

23 नर और 5 मादा भैंसों की जब्ती से जुड़ा मामला
मामला जशपुर जिले की मनोरा पुलिस चौकी का है, जहां पुलिस ने ट्रक (HR 55 Q 5980) की जांच के दौरान 23 नर और 5 मादा भैंसों को बरामद किया था। आरोप था कि इन्हें अवैध रूप से छत्तीसगढ़ से झारखंड के कत्लखाने ले जाया जा रहा था।
इसके बाद झारखंड के गुमला निवासी मो. वसीम कुरैशी ने मवेशियों को सुपुर्दनामा पर देने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) जशपुर और बाद में सेशन कोर्ट ने भी उसका आवेदन खारिज कर दिया।

लार्जर बेंच ने साफ किया कानून का दायरा
निचली अदालतों से राहत नहीं मिलने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने पूर्व के एक फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत बताते हुए मामला डिवीजन (लार्जर) बेंच को भेज दिया। विस्तृत सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 7 और 18 के तहत मुकदमे के अंतिम निर्णय तक जब्त पशुओं की कस्टडी केवल पंजीकृत गौशाला, गोसदन या गोरक्षण संस्थान को ही दी जा सकती है।

विशेष कानून को मिलेगी प्राथमिकता
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में विशेष अधिनियम के प्रावधान सामान्य आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) पर प्रभावी होंगे। इसलिए मजिस्ट्रेट सामान्य धाराओं का उपयोग कर आरोपी या उसके प्रतिनिधि को मवेशी सुपुर्द नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि तस्करी के आरोपियों को ही पशु वापस दिए जाने लगे, तो पशु संरक्षण कानून का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। इस फैसले को मवेशी तस्करी से जुड़े मामलों में भविष्य के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल माना जा रहा है।






































