HEATLH NEWS. देश में तंबाकू, गुटखा, पान मसाला और सुपारी के बढ़ते सेवन के साथ ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। रायपुर के रूप जीवन हॉस्पिटल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अनिल जैन का कहना है कि यदि समय रहते शुरुआती संकेतों की पहचान कर ली जाए, तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। इसी बीच ‘थ्री फिंगर टेस्ट’ चर्चा में है, जिसे मुंह के कम खुलने की प्राथमिक जांच के तौर पर देखा जा रहा है।

इस आसान सेल्फ टेस्ट में व्यक्ति को अपना मुंह पूरी तरह खोलकर हाथ की तीन उंगलियां एक साथ मुंह में डालने की कोशिश करनी होती है। यदि तीनों उंगलियां आसानी से दांतों के बीच चली जाती हैं, तो सामान्य स्थिति मानी जाती है। लेकिन यदि केवल एक या दो उंगलियां ही जा रही हों और मुंह पूरा न खुल रहा हो, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

क्या यह कैंसर की पुष्टि करता है?
कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, थ्री फिंगर टेस्ट कैंसर की पुष्टि करने वाला टेस्ट नहीं है। हालांकि, मुंह का कम खुलना ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (OSMF) नामक प्री-कैंसरस स्थिति का संकेत हो सकता है। यह बीमारी लंबे समय तक तंबाकू, गुटखा या सुपारी के सेवन से होती है, जिसमें मुंह के अंदर की त्वचा कठोर हो जाती है और धीरे-धीरे मुंह खुलना कम हो जाता है। समय पर इलाज न होने पर यह आगे चलकर ओरल कैंसर में बदल सकती है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों के अनुसार यदि मुंह कम खुलने के साथ-साथ मसालेदार भोजन खाने पर जलन, मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे, जीभ या होंठ पर ऐसा घाव जो 2-3 सप्ताह में ठीक न हो, या चबाने, निगलने और बोलने में परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

ऐसा होने पर क्या करें?
यदि थ्री फिंगर टेस्ट में तीन उंगलियां मुंह में नहीं जा रही हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले तंबाकू, गुटखा, सुपारी और धूम्रपान जैसी आदतों को तुरंत छोड़ें। इसके बाद किसी डेंटिस्ट या ईएनटी (कान-नाक-गला) विशेषज्ञ से जांच कराएं। शुरुआती अवस्था में दवाइयों, माउथ एक्सरसाइज और जीवनशैली में बदलाव से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

27 जुलाई को नि:शुल्क जांच एवं परामर्श शिविर
ओरल कैंसर की शुरुआती पहचान और जागरूकता के उद्देश्य से रायपुर के रूप जीवन हॉस्पिटल में 27 जुलाई को नि:शुल्क जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर में मुंह कम खुलने, तंबाकू-गुटखा के दुष्प्रभाव और ओरल कैंसर से संबंधित जांच व विशेषज्ञ परामर्श दिया जाएगा। आम नागरिकों से शिविर का लाभ उठाने की अपील की गई है।





































