BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस आरक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग पदोन्नति की विभागीय प्रक्रिया जारी रख सकता है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक का अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा। जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मामला पुलिस विभाग में आरक्षकों की वरिष्ठता सूची तैयार करने के तरीके को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार देशमुख ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा स्वेच्छा से दूसरे जिले में स्थानांतरित होकर पहुंचे आरक्षकों की वरिष्ठता निर्धारित करने में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

याचिका के अनुसार, नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि स्वेच्छा से दूसरे जिले में स्थानांतरण लेने वाले आरक्षक को नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद विभाग ऐसे कर्मचारियों की वरिष्ठता उनकी मूल नियुक्ति तिथि से जोड़कर तय कर रहा है, जिससे पहले से संबंधित जिले में कार्यरत आरक्षकों के पदोन्नति के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता धीरज कुमार वानखेड़े ने कोर्ट में दलील दी कि विभाग नियमों की अनदेखी करते हुए पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो पात्र आरक्षकों के अधिकारों का हनन होगा और वरिष्ठता व्यवस्था प्रभावित होगी।

वहीं राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने कहा कि याचिका में पुलिस मुख्यालय के स्पष्टीकरण पत्र को सीधे चुनौती नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ याचिकाकर्ता स्वयं भी पदोन्नति की पात्रता सूची में शामिल हो सकते हैं। मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए राज्य सरकार ने अदालत से समय मांगा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने तथा छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल, आरक्षक (भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा की शर्तें) नियम, 2007 के प्रावधानों का अवलोकन करने के बाद हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक के पक्ष में अंतिम प्रमोशन आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
अब इस मामले में राज्य सरकार सहित सभी पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा, जिसके बाद हाई कोर्ट आगे की सुनवाई में अंतिम निर्णय की दिशा तय करेगा।






































