BIJAPUR/ RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में बाघों के शिकार का मामला अब महज वन्यजीव अपराध तक सीमित नहीं रह गया है। महाराष्ट्र पुलिस की इंटेलिजेंस विंग से जुड़े दो आरोपियों के नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ वन विभाग ने केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश की है। विभाग ने राज्य के गृह विभाग को पत्र भेजकर CBI जांच की मांग की है।
वन विभाग की शुरुआती जांच में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच सक्रिय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के संकेत मिले हैं। आशंका है कि बाघों के अंगों की तस्करी का नेटवर्क राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैला हो सकता है।

दो बाघों की खाल के साथ पकड़े गए थे आरोपी
छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा के पास वन विभाग की टीम ने बियरी गेडाम और बाबूराव मडावी को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पकड़ा था। दोनों के कब्जे से दो बाघों की खाल, 13 मूंछें और महाराष्ट्र नंबर की बाइक बरामद हुई।
दोनों महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से छत्तीसगढ़ की ओर आ रहे थे। पूछताछ में गेडाम ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस की स्पेशल ब्रांच का कांस्टेबल बताया, जबकि मडावी ने खुद को गढ़चिरौली पुलिस का मुखबिर बताया।

जंगल में मिले शिकार के हथियार और बाघ के अंग
आरोपियों से पूछताछ के बाद जांच टीम ने बीजापुर जिले के नेतीवाड़ा और महाराष्ट्र सीमा से लगे इलाकों में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जंगल से शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे, चाकू, 12 पंजे, चार कैनाइन दांत समेत अन्य सामान बरामद किया गया।
इसके बाद 5 जुलाई को इंद्रावती नदी के किनारे तीसरे बाघ की खाल भी बरामद हुई। इस मामले में सात अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 6 जुलाई को सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। अब तक कुल नौ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

नौ में चार आरोपी महाराष्ट्र के रहने वाले
वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार नौ आरोपियों में चार महाराष्ट्र के निवासी हैं। इनमें गेडाम और मडावी का संबंध महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस नेटवर्क से बताया जा रहा है। यही कड़ी अब पूरे मामले की जांच में सबसे अहम मानी जा रही है।
वन विभाग को आशंका है कि इंद्रावती नदी के आसपास के दुर्गम जंगलों का इस्तेमाल लंबे समय से वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के लिए किया जा रहा हो सकता है।
देश-विदेश तक फैले नेटवर्क की आशंका
शुरुआती जांच में शिकार सिंडिकेट की कड़ियां छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र दोनों से जुड़ती नजर आ रही हैं। वन विभाग को आशंका है कि बाघों की खाल और अन्य अंगों की तस्करी का नेटवर्क दूसरे राज्यों और संभवतः अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हो सकता है।
इसी वजह से विभाग का मानना है कि मामले की पूरी तह तक पहुंचने के लिए जांच को केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों में भी कार्रवाई और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।
गृह विभाग को भेजा गया CBI जांच का प्रस्ताव
वन विभाग ने गृह विभाग को भेजे पत्र में मामले की CBI से जांच कराने की सिफारिश की है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक, छत्तीसगढ़ वन बल और मुख्य वन्यजीव संरक्षक की ओर से यह प्रस्ताव भेजा गया है। अब आगे की कार्रवाई राज्य के गृह विभाग के स्तर से होनी है।
पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी ने बढ़ाई चिंता
मामले में महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े बियरी गेडाम की गिरफ्तारी सबसे चौंकाने वाला पहलू है। बताया गया है कि गेडाम को 2021 में नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली में उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी मिला था।
गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने गेडाम और मडावी दोनों को निलंबित कर दिया है। गढ़चिरौली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार दोनों से पूछताछ की जा रही है।
महाराष्ट्र पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया दोनों की भूमिका छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार तक सीमित नजर आ रही है। महाराष्ट्र में किसी अन्य शिकार की घटना से उनका लिंक फिलहाल सामने नहीं आया है।

सेवा से बर्खास्तगी की तैयारी
नागपुर रेंज के आईजी संदीप पाटिल ने मामले को गंभीर चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग ऐसे अपराधों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करता है। दोनों आरोपियों के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू किए जाने की बात भी सामने आई है।
जांच के सामने कई बड़े सवाल
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह मामला सिर्फ तीन बाघों के शिकार तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क सक्रिय है। बाघों की खाल और अंग कहां भेजे जाने थे? क्या इंद्रावती के दुर्गम जंगलों का इस्तेमाल लंबे समय से तस्करी के लिए किया जा रहा था? और क्या जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े नाम सामने आएंगे?
महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी और बाघों के अंगों की बरामदगी ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब CBI जांच को लेकर राज्य सरकार के फैसले पर नजर है। यदि जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाती है, तो इस पूरे शिकार और संभावित तस्करी नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है।



































