RAIPUR NEWS. झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में NIA की विशेष अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाने और नार्को टेस्ट की मांग किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन ने कांग्रेस पर पलटवार किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रविवार को बिलासपुर दौरे के लिए रवाना हुए। वे बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित तीजा-पोरा कार्यक्रम में शामिल होंगे। रवाना होने से पहले उन्होंने झीरम घाटी मामले के फैसले और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी।
CM साय बोले- NIA ने 100 से ज्यादा गवाहों के बयान लिए
झीरम घाटी मामले में कांग्रेस के बयान पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई थी। उस समय केंद्र में UPA की सरकार थी। NIA ने मामले की सुनवाई के दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए। इसके बाद अदालत ने 10 से अधिक आरोपियों को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि 16 सितंबर को NIA की विशेष अदालत दोषियों की सजा तय करेगी।

मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तंज कसते हुए कहा कि यदि उनके पास इस मामले से जुड़े कोई साक्ष्य थे, तो उन्हें जांच एजेंसी को सौंपना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वे सबूत अपनी जेब में लेकर घूमने की बात करते थे।
भूपेश बघेल का प्रभार बदलने पर भी साधा निशाना
भूपेश बघेल को असम कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने पर मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस संगठन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चलती है। सीएम ने कहा कि भूपेश बघेल पहले पंजाब के प्रभारी थे, जहां उनका विरोध हुआ और इसी वजह से उनका प्रभार बदल दिया गया।

मंत्री देवांगन का सवाल- 5 साल सत्ता में रहकर क्यों चुप रहे?
गौरेला पहुंचे उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने भी कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बयानों में अब कोई दम नहीं रह गया है। NIA एक राष्ट्रीय और स्वायत्त जांच एजेंसी है, जिसने संवेदनशील झीरम घाटी मामले की जांच तथ्यों के आधार पर की है। जांच के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया है और अब 16 सितंबर को सजा का ऐलान किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए देवांगन ने कहा कि वे लंबे समय तक दावा करते रहे कि झीरम कांड के सबूत और मुख्य षड्यंत्रकारियों का ‘चिट्ठा’ उनकी जेब में है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छत्तीसगढ़ में पांच साल तक कांग्रेस की सरकार थी और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने वह कथित चिट्ठा सार्वजनिक क्यों नहीं किया?
मंत्री ने कहा कि पांच साल सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर पाई। अब जब जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, तो कांग्रेस जांच पर सवाल उठाकर लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

‘जांच एजेंसियों पर सवाल उठाना गलत’
लखन लाल देवांगन ने कहा कि देश की प्रमुख जांच एजेंसियों पर राजनीतिक आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का रुख स्पष्ट है कि अपराध में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। झीरम घाटी मामले में भी न्यायिक प्रक्रिया कानून के मुताबिक आगे बढ़ रही है और अदालत के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए।



































