CRUDE OIL PRICE: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी गुरुवार सुबह भी देखने को मिली। कारोबारी सत्र के दौरान ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा क्रूड ऑयल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत के आयात बिल, रुपये की कीमत और महंगाई पर पड़ सकता है।

पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
क्रूड ऑयल महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में लंबे समय से बदलाव नहीं हुआ है। इसका असर सरकारी तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पर पड़ रहा है।

एनालिस्ट्स के अनुमान के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। वहीं, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर पर भी कंपनियों को करीब 200 रुपये प्रति सिलेंडर का नुकसान होने का दावा किया गया है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों पर कीमतों में बदलाव का दबाव और बढ़ सकता है।
मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से बढ़ी चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव प्रमुख कारणों में शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के अलावा होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका ने भी वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है।

इसके साथ ही OPEC+ देशों की ओर से उत्पादन को सीमित रखने के फैसले का असर भी क्रूड की कीमतों पर पड़ रहा है। सप्लाई को लेकर किसी भी तरह की बड़ी बाधा की आशंका बाजार में कीमतों को और ऊपर ले जा सकती है।
भारत का तेल आयात बिल बढ़ा, रुपये पर भी दबाव
भारत दुनिया के प्रमुख कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है और अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा क्रूड ऑयल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल भी बढ़ जाता है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई के बीच भारत का तेल आयात बिल 56 प्रतिशत बढ़कर 63.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया। बढ़ते आयात खर्च से रुपये पर दबाव बढ़ने और व्यापार घाटे में इजाफा होने की चिंता भी बढ़ी है।
महंगा क्रूड भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डॉलर में होने वाले तेल आयात का खर्च बढ़ने से विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ सकती है।
महंगे क्रूड का असर रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ सकता है
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। विमानन, टायर, केमिकल, लॉजिस्टिक्स और FMCG जैसे कई सेक्टरों की लागत पर इसका सीधा या अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ने की स्थिति में कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों तक पहुंचा सकती हैं। इससे रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतें बढ़ने और रिटेल महंगाई पर दबाव आने की आशंका रहती है।
अगर क्रूड ऑयल लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो महंगाई को नियंत्रित करना मौद्रिक नीति के लिए भी चुनौती बन सकता है।
दिल्ली में पेट्रोल-डीजल के दाम में बदलाव नहीं
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बावजूद घरेलू बाजार में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है।
क्रूड की कीमतों में तेजी के कारण आने वाले दिनों में घरेलू ईंधन कीमतों को लेकर भी नजर बनी रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो इसका दबाव तेल कंपनियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।



































