BILASPUR NEWS. अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मृत शासकीय कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी भी मामले में परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन किए बिना केवल तकनीकी आधार पर आवेदन निरस्त करना योजना के मूल उद्देश्य और मानवीय भावना के विपरीत है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए अंबिकापुर नगर निगम की अपील खारिज कर दी और सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें आवेदक के पक्ष में राहत दी गई थी।

सफाई कर्मचारी के निधन के बाद मांगी थी नौकरी
मामला अंबिकापुर नगर निगम में कार्यरत एक सफाई कर्मचारी के आकस्मिक निधन से जुड़ा है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार में पत्नी, तीन पुत्र और एक पुत्री रह गए थे, जिनका भरण-पोषण उसी की आय पर निर्भर था। इसके बाद पुत्र ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।

मां की नौकरी का हवाला देकर आवेदन किया गया था खारिज
नगर निगम ने आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि मृतक की पत्नी पहले से निगम में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं। निगम ने राज्य शासन की 14 जून 2013 की नीति का हवाला देते हुए दावा किया कि परिवार का एक सदस्य शासकीय सेवा में होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट ने माना- आर्थिक हालात की जांच जरूरी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उसकी मां का वेतन इतना नहीं है कि बड़े परिवार की सभी जरूरतें पूरी हो सकें। परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति का आकलन किए बिना आवेदन निरस्त कर दिया गया।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि किसी परिवार का एक सदस्य कम वेतन वाली नौकरी में है, तो इसे यह मानने का आधार नहीं बनाया जा सकता कि परिवार आर्थिक संकट से उबर चुका है। अधिकारियों को प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का व्यावहारिक मूल्यांकन करना चाहिए।

लकीर का फकीर’ न बनें अधिकारी
अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई सामान्य भर्ती प्रक्रिया नहीं, बल्कि संकटग्रस्त परिवार को तत्काल आर्थिक सहारा देने वाली कल्याणकारी योजना है। ऐसे मामलों में अधिकारियों को केवल नियमों की शब्दशः व्याख्या तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि योजना के उद्देश्य और मानवीय पक्ष को भी ध्यान में रखना चाहिए।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने अंबिकापुर नगर निगम की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराया।




































