BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ की नदियों में कथित प्रदूषण और शराब फैक्ट्रियों की भूमिका को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सरकारी अधिकारियों और फैक्ट्री प्रबंधन के दावों पर सवाल उठाते हुए मामले की स्वतंत्र जांच कराने का फैसला किया है। इसके लिए दो अधिवक्ताओं को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया गया है, जो प्रभावित क्षेत्रों और डिस्टिलरी इकाइयों का निरीक्षण कर 30 दिनों के भीतर अपनी सीलबंद रिपोर्ट अदालत को सौंपेंगे।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। मीडिया में इस मामले के आने के बाद हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेने के बाद सुनवाई शुरू हुआ था। अदालत ने पहले ही राज्य शासन और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से जवाब मांगा था।

सरकार का दावा- नदियों में ऑक्सीजन स्तर सामान्य
सुनवाई के दौरान राज्य शासन और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की ओर से शपथ पत्र प्रस्तुत कर बताया गया कि अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की है। रिपोर्ट के अनुसार शिवनाथ और खारून नदी में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य पाया गया तथा प्रदूषण संबंधी कोई गंभीर स्थिति नहीं मिली।

डिस्टिलरी ने खुद को बताया निर्दोष
भाटिया डिस्टिलरीज की ओर से अदालत को बताया गया कि उनका संयंत्र ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (जेडएलडी) तकनीक पर संचालित होता है और फैक्ट्री से किसी प्रकार का दूषित रासायनिक पानी बाहर नहीं छोड़ा जाता। कंपनी ने प्रकाशित खबरों को भी आधारहीन बताया।
वेलकम डिस्टिलरीज पर पहले ही लग चुका है जुर्माना
हालांकि सुनवाई के दौरान पर्यावरण मंडल ने वेलकम डिस्टिलरीज के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी अदालत को दी। विभाग के अनुसार नियमों के लगातार उल्लंघन के चलते यूनिट को बंद करने के आदेश जारी किए गए थे और उस पर 54.60 लाख रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया गया था। हालिया निरीक्षण में ऑनलाइन प्रदूषण निगरानी प्रणाली बंद पाई गई तथा वायु प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक दर्ज किया गया।

कोर्ट कमिश्नर करेंगे जमीनी हकीकत की जांच
मामले में परस्पर विरोधी दावों और वास्तविक स्थिति जानने के लिए हाईकोर्ट ने एडवोकेट वैभव शुक्ला और एडवोकेट अपूर्व त्रिपाठी को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। दोनों कमिश्नर पर्यावरण मंडल के अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों तथा तीनों डिस्टिलरी इकाइयों का संयुक्त निरीक्षण करेंगे।
अदालत ने सभी फैक्ट्री प्रबंधन को जांच में पूर्ण सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट के आधार पर अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।



































