NEW DELHI NEWS. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ऑनलाइन पेमेंट को बेहतर बनाने के लिए लगातार बदलाव कर रहा है। इसी क्रम में आरबीआई ने रिकरिंग (ऑटो) पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए नया ई-मेंडेट फ्रेमवर्क लागू किया है। अब 15 हजार रु. से ज्यादा के हर ऑटो पेमेंट से कम से कम 24 घंटे पहले प्री-नोटिफिकेशन भेजना जरूरी होगा। इसमें व्यापारी का नाम, राशि, तारीख और डेबिट का कारण बताया जाएगा।

इसके लिए ग्राहक चाहें तो पेमेंट रोक (ऑप्ट आउट) सकते हैं या राशि बदल सकते हैं। ट्रांजैक्शन के बाद पोस्ट-नोटिफिकेशन भी देना अनिवार्य होगा, जिसमें शिकायत निवारण की जानकारी होगी। 15 हजार रु. तक के पेमेंट एएफए (एडिशनल फैक्टर ऑफ ऑथेंटिकेशन) के बिना हो सकेंगे। बीमा, म्यूचुअल फंड और क्रेडिट कार्ड बिल के लिए सीमा 1 लाख रु. है। बाकी सभी भुगतानों में एएफए जरूरी रहेगा।

ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। पहले अलग-अलग नियम थे, अब सभी पेमेंट के लिए एकीकृत फ्रेमवर्क लागू होगा। इसमें ओटीटी सब्सक्रिप्शन (नेटफ्लिक्स, सोनी लिव, घर/कार की ईएमआई (कार्ड मेंडेट), यूपीआई ऑटोपे, पीपीआई (पेटीएम, फोनपे वॉलेट, गिफ्ट कार्ड, फास्टैग), क्रॉस बॉर्डर पेमेंट, ओवरसीज सब्सक्रिप्शन/ई-कॉमर्स खरीदारी, विदेश में पैसे भेजना, फ्रीलांस पेमेंट सुविधा मिलेगी।

इसलिए खास होगा नया नियम
फीचर पहले (पुराना सिस्टम) अब (नया स्मार्ट नियम)
नियम कायदे बिखरे हुए सर्कुलर एकीकृत फ्रेमवर्क (एक जगह)
पंजीयन बार-बार की जटिल प्रक्रिया वन-टाइम एएफए मेंडेट कंट्रोल सीमित और अस्पष्ट सुविधा बदलने/रद्द करने की पूर्ण आजादी

पेमेंट लिमिट कोई सीमा तय नहीं थी अधिकतम सीमा खुद तय करें ट्रांजैक्शन बार-बार अथेंटिकेशन झंझट पहला ट्रांजैक्शन, फिर आसान भुगतान
रोकने का विकल्प विकल्प सीमित या गायब हर ट्रांजैक्शन पर स्टॉप बटन
अतिरिक्त चार्ज चार्ज पर स्थिति साफ नहीं पूरी तरह मुफ्त
कार्ड रिन्यूअल कार्ड बदलते ही मेंडेट खत्म नया कार्ड, पुराना मेंडेट जारी



































