BILASPUR NEWS. प्रदेश में चल रही पुलिस आरक्षक से प्रधान आरक्षक पदोन्नति प्रक्रिया पर बड़ा अंतरिम आदेश जारी करते हुए अंतिम प्रमोशन आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) अपनी मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया जारी रख सकती है, लेकिन हाईकोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी आरक्षक की पदोन्नति का अंतिम आदेश जारी नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है।

मामले की सुनवाई कर रही एकलपीठ के न्यायाधीश ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य शासन, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), आईजी बिलासपुर रेंज और एसपी कोरबा सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह अंतरिम आदेश कोरबा और अन्य जिलों के आरक्षकों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया।

क्या है विवाद?
विवाद की जड़ पुलिस विभाग में तैयार की जा रही वरिष्ठता सूची है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि विभाग द्वारा ऐसे आरक्षकों को भी शुरुआती नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठ मानते हुए पदोन्नति देने की तैयारी की जा रही थी, जिन्होंने स्वेच्छा से दूसरे जिलों में स्थानांतरण लिया था।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ पुलिस एग्जीक्यूटिव फोर्स कॉन्स्टेबल भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा शर्त नियम 2007 के विपरीत है। नियमों के तहत यदि कोई पुलिसकर्मी अपनी इच्छा से दूसरे जिले में ट्रांसफर लेता है, तो उसे नए जिले की वरिष्ठता सूची में अंतिम स्थान पर रखा जाना चाहिए।

73 आरक्षकों ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
कोरबा जिले के विभिन्न थानों में पदस्थ आरक्षक लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य समेत 73 पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रमोशन प्रक्रिया को चुनौती दी है। याचिका में दावा किया गया कि यदि अदालत हस्तक्षेप नहीं करती, तो 1 जून को जारी होने वाली ‘फाइनल फिट लिस्ट’ से लंबे समय से जिले में सेवाएं दे रहे स्थानीय आरक्षकों के अधिकार प्रभावित हो सकते थे।

ट्रांसफर लेकर प्रमोशन का शॉर्टकट चर्चा में
पुलिस विभाग में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि कई बड़े जिलों के आरक्षक पदोन्नति की संभावनाएं बढ़ाने के लिए नवगठित या छोटे जिलों में स्थानांतरण ले लेते हैं। वहां बल कम होने और प्रतिस्पर्धा सीमित होने के कारण वरिष्ठता सूची में तेजी से आगे बढ़ने का लाभ मिलता है। आरोप है कि कुछ मामलों में प्रमोशन मिलने के बाद कर्मचारी फिर पुराने जिलों में वापसी करा लेते हैं, जिससे मूल जिले के कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है।

बिलासपुर संभाग में 795 आरक्षक पदोन्नति के पात्र
आईजी कार्यालय बिलासपुर के आंकड़ों के अनुसार, बिलासपुर संभाग में कुल 795 आरक्षक प्रधान आरक्षक पदोन्नति के लिए पात्र पाए गए हैं। इनमें बिलासपुर और रायगढ़ से सर्वाधिक 230-230 आरक्षक शामिल हैं, जबकि कोरबा से 85, जांजगीर-चांपा और सारंगढ़-बिलाईगढ़ से 60-60, सक्ती से 50 तथा मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से 40-40 आरक्षक शामिल हैं।
अब इन सभी पदोन्नतियों की वैधानिकता हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।



































