BILASPUR NEWS. हाईकोर्ट ने ईंधन, पर्यावरण और सरकारी संसाधनों की बचत के उद्देश्य से एक अनूठी और दूरदर्शी पहल की है। के निर्देश पर जारी सर्कुलर के तहत इस वर्ष ग्रीष्मकालीन अवकाश (समर वेकेशन) के दौरान मामलों की सुनवाई मुख्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी। इस फैसले से भीषण गर्मी में वकीलों और पक्षकारों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, समर वेकेशन में वकीलों और पक्षकारों को अदालत परिसर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। मामलों की सुनवाई वर्चुअल माध्यम से की जाएगी, जिससे समय, संसाधन और ईंधन की बचत सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, तकनीकी दिक्कतों या अन्य अपरिहार्य परिस्थितियों में वकीलों को कोर्ट में उपस्थित होकर सुनवाई में शामिल होने की अनुमति रहेगी। जरूरत पड़ने पर अदालत किसी मामले में फिजिकल सुनवाई के आदेश भी दे सकेगी।

कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम
सर्कुलर में न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखते हुए संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए रोटेशन व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि कार्यालय में कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति बनी रहे और कामकाज प्रभावित न हो। घर से कार्य करने वाले कर्मचारियों को फोन व अन्य सरकारी संचार माध्यमों पर उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा।

ईंधन बचाने के लिए कार पूलिंग पर जोर
ईंधन की खपत कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच साझा वाहन व्यवस्था यानी ‘कार पूलिंग’ को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। साथ ही, माननीय न्यायाधीशों से भी आपसी समन्वय के साथ वाहन साझा करने का आग्रह किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और न्यायिक सुविधा का संतुलन
हाईकोर्ट प्रशासन के अनुसार, यह पहल आधुनिक तकनीक के उपयोग, संस्थागत जिम्मेदारी और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर की गई है। प्रशासन का कहना है कि इससे एक ओर न्यायिक कार्य प्रभावित हुए बिना जारी रहेंगे, वहीं दूसरी ओर ईंधन और संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यावरण सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।




































