RAIPUR NEWS. रायपुर मेडिकल कॉलेज में पीजी छात्रा से कथित यौन उत्पीड़न के मामले में अब प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले में गवाह बताए जा रहे पीजी छात्र डॉ. इक्षित सिंह को परीक्षा से रोकने के कुलसचिव के आदेश के बाद सवाल उठने लगे। विवाद बढ़ने पर आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीके पात्रा ने आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।

क्या है पूरा मामला?
मामला जुलाई 2025 का है। रायपुर मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एक पीजी छात्रा ने विभाग के तत्कालीन एचओडी डॉ. आशीष सिन्हा पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। छात्रा ने पहले स्वास्थ्य विभाग में शिकायत की। लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए बाद में मौदहापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
जांच के दौरान छात्रा के सहपाठी डॉ. इक्षित सिंह ने भी उसकी शिकायत के समर्थन में बयान दिया। इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज हुई और आरोपी डॉ. आशीष सिन्हा की गिरफ्तारी की गई। जमानत मिलने के बाद उन्हें मेडिकल एजुकेशन डायरेक्टोरेट में अटैच किया गया।

गवाह छात्र को परीक्षा से रोकने का आदेश
इसी बीच आयुष विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. दिनेश सिन्हा की ओर से एक आदेश जारी किया गया। इसमें डॉ. इक्षित सिंह पर डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंट पोस्टिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया और उन्हें मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं करने के निर्देश दिए गए।
आदेश में जांच पूरी होने और रिपोर्ट आने तक कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अन्य पीजी छात्रों को भी परीक्षा में शामिल नहीं करने की बात कही गई थी। एक छात्र से जुड़े कथित नियम उल्लंघन के मामले में पूरे पीजी बैच की परीक्षा रोकने के निर्देश ने विवाद को और बढ़ा दिया।

गवाही से जुड़े होने पर उठे सवाल
डॉ. इक्षित सिंह का नाम यौन उत्पीड़न मामले में गवाह के तौर पर सामने आया है। कॉलेज स्तर की जांच के दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि डॉ. आशीष सिन्हा की ओर से उन पर दबाव बनाया जाता था और शिकायतकर्ता छात्रा से दूर रहने के लिए कहा गया था।
ऐसे में उनके खिलाफ परीक्षा रोकने की कार्रवाई सामने आने के बाद आरोप लगने लगे कि यह कदम उनकी गवाही को प्रभावित करने या आरोपी को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कुलसचिव के आदेश के अधिकार पर भी सवाल
विवाद का एक अहम पहलू यह भी है कि मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से रोकने का अधिकार विश्वविद्यालय के कुलसचिव के पास किस नियम के तहत है। आदेश सामने आने के बाद इसके अधिकार क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठे।
मामला सामने आने के बाद आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीके पात्रा ने कुलसचिव के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
कुलसचिव ने क्या कहा?
कुलसचिव डॉ. दिनेश सिन्हा से आदेश के आधार, परीक्षा रोकने के अधिकार और डॉ. इक्षित सिंह के खिलाफ कार्रवाई का यौन उत्पीड़न मामले से कथित संबंध होने को लेकर सवाल पूछे गए।
कुलसचिव ने इन सवालों पर कहा कि मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरी जानकारी दी जाएगी।

अब उठ रहे हैं ये सवाल
कुलपति द्वारा आदेश निरस्त किए जाने के बाद पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि जांच पूरी होने तक परीक्षा रोकना जरूरी था, तो आदेश को तत्काल निरस्त क्यों किया गया? और यदि कुलसचिव के पास ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार नहीं था, तो आदेश जारी करने का आधार क्या था?
फिलहाल, यौन उत्पीड़न मामले की जांच और गवाह छात्र के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बीच कथित संबंध को लेकर विवाद बना हुआ है। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि डॉ. इक्षित सिंह के खिलाफ की गई कार्रवाई का वास्तविक आधार क्या था।



































