JHANSI NEWS. उत्तर प्रदेश के झांसी में पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। प्रेमनगर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन आरोपी अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।पुलिस की जांच में इस गिरोह से जुड़े 56 बैंक खातों का पता चला है। इन खातों के जरिए देशभर में हुई साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर किया जाता था। पुलिस के मुताबिक, अब तक की जांच में करीब 403 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल सामने आई है।

गैंग में इंटर और ग्रेजुएशन के छात्र
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरोह में पढ़ने वाले छात्र भी शामिल थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों में मंगवाते थे। इसके बाद रकम को कई स्तरों पर घुमाकर USDT में बदल दिया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन, हिसाब-किताब की डायरी और करीब 500 USDT से संबंधित बरामदगी की है। मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है
मास्टरमाइंड अरमान, कुछ महीनों में बदल गई जिंदगी!
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि अरमान इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड है। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी की दुनिया में आने के बाद उसके रहन-सहन में तेजी से बदलाव आया। जांच में सामने आया कि कुछ समय पहले तक अरमान एक छोटे मकान में परिवार के साथ रहता था, लेकिन बाद में उसने प्रेमनगर क्षेत्र में फ्लैट और शहर के पॉश इलाके में मकान खरीदा। अब वह कथित तौर पर लग्जरी कार से चलता था। पुलिस ने उसके बैंक खातों और अन्य संपत्तियों की जांच की तो करीब 20 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े सुराग मिलने की बात सामने आई है।

हर तीन दिन में खाते में आ रहे थे लाखों रुपये
पुलिस जांच के मुताबिक, पिछले महीने अरमान से जुड़े खातों में हर तीन दिन में करीब 6.75 लाख रुपये तक क्रेडिट होने की जानकारी मिली। बताया जा रहा है कि उसने गिरोह में कई युवकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी थीं। सत्यम को उसका करीबी बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, उसके जिम्मे साइबर ठगी की रकम को डेबिट कार्ड के जरिए निकालने का काम था। हालांकि गिरोह के भंडाफोड़ के बाद कुछ आरोपी फरार हो गए।

114 म्यूल खातों का भी पता चला
साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए गिरोह कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। पुलिस को अब तक करीब 114 ऐसे खातों का पता चला है, जिनके जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर किया जाता था। इन खातों की जांच के जरिए पुलिस मनी ट्रेल को आगे तक जोड़ने की कोशिश कर रही है।
USDT क्यों बना साइबर ठगों का पसंदीदा जरिया?
पुलिस के मुताबिक, गिरोह साइबर ठगी से मिली रकम को USDT में बदलकर विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाता था। USDT एक डॉलर से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। साइबर अपराधियों के लिए क्रिप्टो वॉलेट के जरिए रकम को तेजी से अलग-अलग जगह ट्रांसफर करना आसान हो सकता है। इसी वजह से जांच एजेंसियां साइबर फ्रॉड के मामलों में क्रिप्टो ट्रांजेक्शन और वॉलेट की भी जांच करती हैं।
चाइनीज गेमिंग सर्वर हैकिंग केस से भी जुड़ रहे तार
झांसी पुलिस अब इस गैंग के तार पहले सामने आए एक चाइनीज गेमिंग सर्वर हैकिंग मामले से भी जोड़कर देख रही है। प्रेमनगर पुलिस ने मई में इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।जांच एजेंसियों को आशंका है कि दोनों नेटवर्क के बीच साइबर ठगी की रकम को खपाने या ट्रांसफर करने को लेकर कोई कनेक्शन हो सकता है। पुलिस दोनों मामलों के आरोपियों और उनके बैंक खातों के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
छह गिरफ्तार, तीन की तलाश जारी
प्रेमनगर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दीपक वर्मा उर्फ सत्यम, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, जान पाल, अभिषेक चौधरी और अर्चित श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है।वहीं, मास्टरमाइंड बताए जा रहे अरमान के अलावा अर्श और मोहम्मद फैज की तलाश जारी है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और बैंक खातों, मोबाइल फोन, डायरी तथा डिजिटल लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।





































