NEW DELHI NEWS. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में चल रही कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही सीबीआई और ईडी को हाईकोर्ट में इस मामले से संबंधित कोई जांच रिपोर्ट या हलफनामा दाखिल नहीं करने का निर्देश दिया गया है।

प्राकृतिक न्याय के पालन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि यदि कोई अदालत निर्देश जारी करती है तो उसे दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही ऐसा करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने प्रथम दृष्टया कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि हाईकोर्ट ने राहुल गांधी का पक्ष सुने बिना ही कुछ निर्देश जारी किए थे।

सीबीआई की कार्रवाई पर कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान एएसजी एस.वी. राजू ने दलील दी कि आरोप गंभीर हैं और सीबीआई शिकायत की जांच कर रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो जांच एजेंसी ने अब तक खुद कार्रवाई क्यों नहीं की?
पीठ ने कहा कि किसी आपराधिक शिकायत की जांच के लिए पुलिस या सीबीआई को हर बार अदालत के आदेश का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या जांच एजेंसी को कार्रवाई के लिए कोर्ट के आदेश या किसी अतिरिक्त प्रोत्साहन की आवश्यकता है।

20 अगस्त की सुनवाई पर भी रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को प्रस्तावित थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट की उस कार्यवाही पर फिलहाल रोक लग गई है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाईकोर्ट में चल रही प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं है। राहुल गांधी ने इस मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग भी की है।
इस मामले में अब अगली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






































