BHILAI NEWS. भिलाई नगर निगम के आयुक्त राजीव पांडेय को पद से हटाने की मांग को लेकर दायर याचिका को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय के लिए बहुमत पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि एजेंडे में शामिल नहीं किए गए विषय पर पारित प्रस्ताव वैध नहीं माना जा सकता।

मामले में निगम के पार्षद संदीप निरंकारी, आदित्य सिंह समेत 32 निर्वाचित पार्षदों ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि आयुक्त मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) और सामान्य सभा की मंजूरी के बिना वित्तीय व प्रशासनिक निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि 25 मार्च 2026 को विशेष बजट बैठक में तीन-चौथाई से अधिक बहुमत से आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।


सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ नगरपालिका (कार्य संचालन) नियम, 2016 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि विशेष बैठक में केवल उन्हीं विषयों पर चर्चा की जा सकती है, जिनका उल्लेख पहले से जारी एजेंडे में हो। आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था, इसलिए उसे वैध नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा कि बजट पारित करना और आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव दो अलग-अलग विषय हैं। बिना पूर्व सूचना और तय प्रक्रिया के सामान्य सभा में ऐसा प्रस्ताव लाना कानून के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि बहुमत अपनी जगह है, लेकिन कानून सर्वोपरि है।






































