BILASPUR NEWS. प्रदेश में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और उनके काटने से हो रही मौतों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बिलासपुर निवासी एक पीड़ित पिता की याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि आवारा कुत्ते के काटने से मौत होने पर मुआवजा देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। सरकार के इस जवाब पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए मामले को गंभीर बताया और जिम्मेदार अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी।

जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की वेकेशन बेंच ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की ओर से आवारा कुत्तों के प्रबंधन और रोकथाम के लिए जारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए सूबे के मुख्य सचिव से शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किस स्तर पर किया जा रहा है और अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 जून को तय की गई है।


लापरवाही हुई तो सीधे अवमानना कार्रवाई
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और संबंधित विभागों को आगामी 7 अगस्त तक हर हाल में अपना शपथ पत्र जमा करना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि निर्देशों के पालन में लापरवाही या देरी सामने आई तो संबंधित नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सीधे अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

मासूम बेटे की मौत के बाद पिता पहुंचे कोर्ट
दरअसल, बिलासपुर निवासी धीरज पारधी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बताया कि उनके मासूम बेटे की मौत आवारा कुत्ते के काटने के बाद हुई थी। बेटे की असमय मौत से आहत पिता ने शासन से चार लाख रुपये मुआवजे की मांग की है। इसी मामले में सुनवाई के दौरान सरकार ने मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं होने की बात कही, जिसके बाद कोर्ट ने प्रशासनिक जिम्मेदारी और आवारा कुत्तों के नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।





































