NEW DELHI NEWS. NEET-UG पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी में कहा कि जब तक परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा। अदालत ने साफ कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NTA अधिकारियों से पूछा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसे संस्थान देशभर में बड़े पैमाने पर और अत्यंत संवेदनशील परीक्षाएं आयोजित करते हैं, लेकिन वहां कभी पेपर लीक जैसी स्थिति क्यों नहीं बनती। अदालत ने टिप्पणी की कि NTA को UPSC जैसी संस्थाओं की कार्यप्रणाली से सीख लेने की जरूरत है ताकि परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सके।

छात्रों को मानसिक आघात से बचाना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा में बैठते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं को मानसिक रूप से गहरा आघात पहुंचाती हैं और परीक्षा प्रणाली पर उनका भरोसा कमजोर करती हैं। अदालत ने कहा कि छात्रों को इस तरह की अनिश्चितता और तनाव से बचाना सरकार और एजेंसियों की जिम्मेदारी है।

पीएम मोदी रख रहे नजर
मामले में केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटना के बाद परीक्षा प्रणाली में कई बड़े सुधार किए गए हैं और आगामी री-एग्जाम के लिए अधिक सुरक्षित व पारदर्शी व्यवस्था लागू की जा रही है।
IIT विशेषज्ञों की मदद लेने की सलाह
जस्टिस नरसिम्हा की पीठ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से परीक्षा जांच और सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत ब्योरा मांगा। साथ ही अदालत ने सुझाव दिया कि NTA को परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए IIT समेत देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी पूछा कि केंद्र सरकार NTA को एक मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाने के लिए क्या कदम उठा रही है।

सुधार के बाद भी चूक क्यों? पूर्व इसरो प्रमुख से कोर्ट का सवाल
हाई-पावर कमेटी पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में NEET पेपर लीक के बाद गठित हाई-पावर कमेटी के प्रमुख और पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन से पूछा कि सुधारों और सिफारिशों के बावजूद परीक्षा प्रणाली में फिर कमजोरियां क्यों सामने आईं।
कमेटी का जवाब: डॉ. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि समिति की अधिकांश सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं और NEET-PG 2025 परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित हुई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सामने आई तकनीकी व प्रशासनिक कमियों को री-टेस्ट से पहले दुरुस्त कर लिया जाएगा।

12 मई को रद्द हुई परीक्षा, 21 जून को री-एग्जाम
गौरतलब है कि देशभर में NEET-UG परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। इसके कुछ दिनों बाद पेपर लीक के आरोप और साक्ष्य सामने आने के बाद व्यापक विरोध शुरू हुआ। बढ़ते दबाव के बीच 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। अब 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है, जिसके लिए प्रशासन की ओर से अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।




































