BILASPUR NEWS. बलौदाबाजार हिंसा मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल समेत तीन प्रमुख आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एन.के. व्यास की एकलपीठ ने टिप्पणी की कि समाज में अशांति फैलाने और कानून व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाले ऐसे मामलों में आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं होगा।

न्यायालय ने कहा कि आरोपियों पर 7 से 8 हजार लोगों की भीड़ को उकसाने, सरकारी एवं निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाने तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमले के गंभीर आरोप हैं। कोर्ट के अनुसार, हिंसा के दौरान करीब 13 से 14 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा और हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गए थे।
हाईकोर्ट ने कुल नौ जमानत याचिकाओं को एक साथ खारिज किया, जिनमें अमित बघेल की चार, अजय यादव की चार और दिनेश कुमार वर्मा की एक याचिका शामिल थी।

पुराना आपराधिक रिकॉर्ड बना बड़ी वजह
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आरोपियों की जमानत का कड़ा विरोध करते हुए उनका आपराधिक रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार अमित बघेल के खिलाफ 17, अजय यादव के खिलाफ 13 और दिनेश कुमार वर्मा के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज बताया गया।
आरोपी पक्ष ने दलील दी कि सह-आरोपी नोविल कुमार नवरंग को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए समान आधार पर इन्हें भी राहत दी जानी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि नोविल कुमार का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था, जबकि वर्तमान आवेदकों के खिलाफ गंभीर मामलों का लंबा रिकॉर्ड मौजूद है।

रजिस्ट्रार ऑफिस में मौजूदगी की दलील पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अमित बघेल की ओर से यह तर्क दिया गया कि 10 जून 2024 को हिंसा के समय वह अपनी पत्नी ईश्वरी बघेल के साथ रजिस्ट्री प्रक्रिया के सिलसिले में रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद थे। कोर्ट ने पेश दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं मानते हुए इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि प्रस्तुत तथ्यों से यह दलील विश्वसनीय प्रतीत नहीं होती।

क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि 10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में एक सामाजिक मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। आरोप है कि मंच से दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों के बाद भीड़ उग्र हो गई और बैरिकेड्स तोड़ते हुए कलेक्टरेट तथा एसपी कार्यालय परिसर में घुस गई।
इसके बाद हिंसक भीड़ ने तोड़फोड़, पथराव और आगजनी की। कई सरकारी वाहन, कलेक्टरेट परिसर और अन्य संपत्तियां आग के हवाले कर दी गईं। घटना में बीच-बचाव कर रहे कई पुलिस अधिकारी और जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे।





































