JHANSI NEWS:पति की मौत के बाद एक महिला और उसकी मासूम बेटी के सामने रहने और भरण-पोषण का संकट खड़ा होने का मामला सामने आया है। न्याय की मांग को लेकर महिला अपनी बेटी के साथ ससुराल पहुंची और घर के दरवाजे पर बैठ गई। महिला का आरोप है कि पति की मौत के कुछ समय बाद ही उसे बेटी समेत घर से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद वह कई वर्षों तक मायके में रहकर मजदूरी करती रही और अपनी बेटी का पालन-पोषण किया।

मामला झांसी के मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के परवारीपुरा मोहल्ले का है। महिला का कहना है कि मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत के बाद पुलिस उसे लेकर ससुराल पहुंची, लेकिन वहां भी विवाद खत्म नहीं हुआ। महिला के मुताबिक, पुलिस की मौजूदगी में उसकी सास ने उसे घर में रहने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
पति की मौत के वक्त गर्भवती थी महिला
ग्राम भंडरा निवासी नेहा की शादी परवारीपुरा निवासी वासुदेव प्रजापति से हुई थी। नेहा के मुताबिक, वर्ष 2019 में उसके पति की मौत हो गई थी। उस समय वह गर्भवती थी।
महिला का आरोप है कि पति की मौत के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने उसे बेटी के साथ घर से बाहर कर दिया। इसके बाद उसे मायके लौटना पड़ा। नेहा का कहना है कि तब से वह अपनी बेटी के साथ मायके में रह रही है।

मजदूरी कर बेटी की परवरिश का दावा
नेहा के मुताबिक, पति की मौत के बाद उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद और बेटी का पालन-पोषण करना था। पिछले करीब पांच-छह वर्षों से वह मेहनत-मजदूरी कर परिवार चला रही है।
महिला का आरोप है कि उसे ससुराल में रहने की जगह नहीं दी गई और पति की संपत्ति तथा अन्य आर्थिक अधिकारों को लेकर भी उसे कोई जानकारी या हिस्सा नहीं मिला। इसी को लेकर उसने कई बार अधिकारियों से शिकायत की।
शिकायत के बाद पुलिस लेकर पहुंची ससुराल
नेहा ने मुख्यमंत्री समेत जिला और स्थानीय प्रशासन को प्रार्थना पत्र देकर अपनी और बेटी की स्थिति बताई और न्याय की मांग की। शिकायत के बाद पुलिस महिला को लेकर उसके ससुराल पहुंची।

महिला को उम्मीद थी कि पुलिस की मौजूदगी में उसे घर में प्रवेश मिल सकेगा और वर्षों से चला आ रहा विवाद खत्म होगा। लेकिन उसके मुताबिक, ससुराल पहुंचने के बाद उसकी सास ने उसे घर में रखने से इनकार कर दिया।

नेहा का आरोप है कि घर के कमरों के ताले तक नहीं खोले गए। इसके बाद वह अपनी बेटी के साथ ससुराल के दरवाजे पर बैठ गई और अपने अधिकारों की मांग करने लगी।
पति की बीमा राशि को लेकर भी सवाल
नेहा ने पति के नाम एलआईसी पॉलिसी होने का भी दावा किया है। महिला का आरोप है कि बीमा की रकम कथित तौर पर गलत रिपोर्ट या कूटरचित दस्तावेजों के जरिए निकाली गई।
महिला ने प्रशासन से मांग की है कि पति की संपत्ति, बीमा पॉलिसी और अन्य आर्थिक अधिकारों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए। उसका कहना है कि यदि उसके और उसकी बेटी का कोई वैधानिक अधिकार बनता है तो उसे दिलाया जाए।
ससुराल पक्ष ने भी महिला के आरोपों से किया इनकार
वहीं, ससुराल पक्ष ने महिला के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। वासुदेव की मां अंगूरी बाई के मुताबिक, उनकी बहू बेटी के साथ अपने हक की मांग को लेकर घर आई है, लेकिन वह उसे घर में रखने के लिए तैयार नहीं हैं।
अंगूरी बाई का कहना है कि उनके बेटे वासुदेव की मौत फांसी लगाने से हुई थी। उनका यह भी कहना है कि उनके पास खुद जीवन-यापन के पर्याप्त साधन नहीं हैं और वह बहू और नातिन की जिम्मेदारी उठाने की स्थिति में नहीं हैं।
पुलिस जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल इस मामले में एक तरफ महिला अपने और अपनी बेटी के अधिकारों की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर ससुराल पक्ष उसे घर में रखने से इनकार कर रहा है। महिला की ओर से धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जबकि ससुराल पक्ष इन आरोपों को स्वीकार नहीं कर रहा है।
पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की जानकारी जुटा रही है। पति की मौत, संपत्ति, बीमा राशि और महिला-बेटी के संभावित अधिकारों से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति जांच और दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट होगी।





































