BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़ी कथित काली कमाई के तार अब गोवा तक पहुंचने के मामले में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। गोवा स्थित करीब 110 करोड़ रुपये के बहुचर्चित वेस्टिन होटल की कुर्की को चुनौती देने वाली याचिका को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को प्रथम दृष्टया पर्याप्त मानते हुए कहा कि आयकर विभाग द्वारा किसी राशि को कर निर्धारण के उद्देश्य से स्वीकार कर लिया जाना, उसे धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच से स्वतः मुक्त नहीं करता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयकर कानून और PMLA का उद्देश्य और कानूनी दायरा अलग-अलग है।

110 करोड़ में खरीदा होटल, 60 करोड़ नकद देने का दावा
ED की जांच के अनुसार, छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट के जरिए अर्जित कथित अवैध कमाई में से करीब 110 करोड़ रुपये डॉ. राहुल अग्रवाल के चाचा एवं दुर्ग निवासी विजय कुमार अग्रवाल तक पहुंचाए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी राशि के माध्यम से गोवा में वेस्टिन होटल खरीदा गया।
होटल का सौदा मेसर्स सर बायोटेक इंडिया लिमिटेड के साथ किया गया था। आरोप के मुताबिक, सौदे में करीब 50 करोड़ रुपये बैंकिंग चैनल के जरिए रजिस्टर्ड सेल डीड में दर्शाए गए, जबकि 60 करोड़ रुपये नकद दिए गए।

8 से 10 किस्तों में पहुंचाए गए 60 करोड़ रुपये
जांच एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट के कथित मुख्य कैश डिस्ट्रीब्यूटर लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल और प्रबीर कुमार शर्मा के बयानों से बड़ी रकम विजय अग्रवाल तक पहुंचने की बात सामने आई है।
ED के अनुसार, राहुल अग्रवाल ने PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज अपने बयान में बताया था कि दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित उनके आवास पर 8 से 10 किस्तों में करीब 60 करोड़ रुपये नकद दिए गए थे।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि कथित रूप से नकदी प्राप्त करने वाले विशाल सक्सेना को बाद में होटल कंपनी में डायरेक्टर बनाया गया। ED ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग के कथित ‘इंटीग्रेशन’ चरण से जुड़ा महत्वपूर्ण तथ्य बताया।
हाईकोर्ट ने खारिज किए याचिकाकर्ताओं के तर्क
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया था कि 60 करोड़ रुपये वैध कारोबारी आय थी और इसे आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष भी स्वीकार किया जा चुका था। यह भी तर्क दिया गया कि विजय अग्रवाल वर्ष 2019 में कंपनी से इस्तीफा दे चुके थे और वे मूल FIR में आरोपी नहीं हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इन तर्कों को इस स्तर पर स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि आयकर कानून के तहत टैक्स निर्धारण और PMLA के तहत कथित अपराध की आय की जांच अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

होटल चलता रहेगा, कर्मचारियों और मेहमानों पर असर नहीं
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि ED द्वारा किए गए प्रोविजनल अटैचमेंट का होटल के नियमित संचालन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। होटल पहले की तरह संचालित होता रहेगा। होटल के कमरे बंद नहीं किए जाएंगे और कर्मचारियों की सेवाओं पर भी कोई असर नहीं होगा।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सक्षम प्राधिकरण अथवा संबंधित ट्रिब्यूनल के समक्ष अपने दावे और पक्ष रखने की स्वतंत्रता भी दी है।
इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से कथित रूप से जुड़े धन के लेन-देन और उससे खरीदी गई संपत्तियों की जांच को लेकर ED को एक बड़ी कानूनी मजबूती मिली है।





































