BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नियमित कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच पूरी किए बिना किसी नियमित शिक्षक को सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने बालोद जिले के जनपद पंचायत डौंडीलोहारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा सहायक शिक्षक (पंचायत) को सेवा से हटाने के आदेश को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया।

जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने कहा कि नियमित कर्मचारी के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से पहले छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 के तहत विभागीय जांच, आरोप पत्र, साक्ष्य और सुनवाई की प्रक्रिया अनिवार्य है। इन नियमों का पालन किए बिना पारित बर्खास्तगी आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता।

233 दिन अनुपस्थित रहने पर हुई थी कार्रवाई
मामला बालोद जिले की अर्जुन्दा निवासी तस्लीम बानो का है, जिनकी नियुक्ति 9 जून 2005 को सहायक शिक्षक (पंचायत) के रूप में हुई थी। वर्ष 2009 में उनकी सेवाएं नियमित कर दी गई थीं। विभाग के अनुसार, वे विभिन्न अवधियों में कुल 233 दिन तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहीं। इसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 अगस्त 2021 को सीईओ ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।

हाईकोर्ट में दी चुनौती
तस्लीम बानो ने वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि नियमित कर्मचारी होने के बावजूद उनके खिलाफ विभागीय जांच नहीं की गई, न आरोप पत्र दिया गया और न ही साक्ष्य दर्ज किए गए। इसलिए बर्खास्तगी का आदेश पूरी तरह अवैध है।
वहीं, जनपद पंचायत की ओर से अधिवक्ता कात्यायनी विप्रप्रिया ने तर्क दिया कि लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और नोटिसों का जवाब नहीं देने के कारण नियमानुसार कार्रवाई की गई थी।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वर्ष 1997 के नियम अस्थायी कर्मचारियों पर लागू होते हैं, जबकि याचिकाकर्ता वर्ष 2009 से नियमित कर्मचारी थीं। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई केवल 1999 के अनुशासन एवं अपील नियमों के तहत ही की जा सकती थी। चूंकि विभाग ने अनिवार्य विभागीय जांच नहीं की, इसलिए बर्खास्तगी का आदेश विधिसम्मत नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने दिए ये निर्देश
हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी का आदेश रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को बकाया वेतन एवं अन्य सेवा लाभों के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन करने की स्वतंत्रता दी है। साथ ही, पहले दिए गए इस्तीफे पर बहाली के बाद नया आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति भी दी गई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभाग चाहे तो नियमानुसार पूरी विभागीय जांच और निष्पक्ष सुनवाई के बाद नए सिरे से कार्रवाई कर सकता है।






































