BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सिम्स (CIMS) भर्ती अनियमितता मामले से जुड़ी जांच रिपोर्ट को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के बावजूद छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम के गोपनीयता संबंधी प्रावधान प्रभावी रहेंगे। जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने राज्य सूचना आयोग (SIC) के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें लोक आयोग को सिम्स भर्ती मामले की गोपनीय जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा-22 अन्य कानूनों पर प्राथमिकता अवश्य देती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि लोक आयोग अधिनियम, 2002 की धारा-14 के तहत जांच प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की गोपनीयता स्वतः समाप्त हो जाती है। दोनों कानून अपने-अपने क्षेत्र में समान रूप से प्रभावी रहेंगे, जब तक उनके बीच प्रत्यक्ष टकराव की स्थिति न हो।

2013-14 की भर्ती से जुड़ा है मामला
मामला सिम्स में वर्ष 2013-14 के दौरान हुई भर्तियों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इस संबंध में वर्ष 2016 में संजीव कुमार पंडल ने छत्तीसगढ़ लोक आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में बिलासपुर निवासी सोमराज श्रीवास्तव ने अप्रैल 2018 में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत शिकायत, जांच और अंतिम आदेश की प्रतियां मांगी थीं।
लोक आयोग के जन सूचना अधिकारी (PIO) ने मई 2018 में सूचना देने से इनकार करते हुए कहा था कि लोक आयोग अधिनियम की धारा-14 के तहत जांच से संबंधित सामग्री गोपनीय है। साथ ही, RTI अधिनियम की धारा 8(1)(जी) एवं 8(1)(एच) के तहत भी ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा था।

सूचना आयोग ने दिया था जानकारी देने का आदेश
इसके बाद आवेदक ने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। आयोग ने 28 मई 2021 को लोक आयोग के निर्णय को पलटते हुए जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। आयोग का मानना था कि RTI अधिनियम की धारा-22 के तहत सूचना का अधिकार अन्य कानूनों पर प्रभावी है, इसलिए गोपनीयता का हवाला देकर सूचना रोकी नहीं जा सकती।

हाई कोर्ट ने पलटा फैसला
राज्य सूचना आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए लोक आयोग ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि RTI अधिनियम और लोक आयोग अधिनियम दोनों अपने-अपने क्षेत्र में लागू रहेंगे। केवल RTI की धारा-22 के आधार पर लोक आयोग अधिनियम की गोपनीयता संबंधी व्यवस्था को निष्प्रभावी नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह तर्क भी अस्वीकार कर दिया कि जांच पूरी होने के बाद गोपनीयता समाप्त हो जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर जांच पूरी होने के बाद भी गोपनीय अभिलेखों को सार्वजनिक किया जा सके।
इस फैसले के साथ ही राज्य सूचना आयोग का आदेश रद्द हो गया और सिम्स भर्ती मामले से संबंधित लोक आयोग की जांच रिपोर्ट एवं अभिलेख कानूनी रूप से गोपनीय बने रहेंगे।






































