BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट कर दिया है कि यदि मृत शासकीय कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है, तो परिवार के किसी अन्य सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई मौलिक या कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में दी जाने वाली राहत है, जिसे केवल निर्धारित नीति और नियमों के तहत ही प्रदान किया जा सकता है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस संबंध में सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी।

सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी की मृत्यु के बाद शुरू हुआ विवाद
मामला धमतरी जिले के कुरुद तहसील कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 स्वर्गीय अशोक कुमार रंगारी से जुड़ा है, जिनका 5 नवंबर 2024 को सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पुत्र हेनरी रंगारी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।
जांच में पता चला कि मृतक का बड़ा पुत्र और हेनरी का सौतेला भाई वीरेंद्र बहादुर रंगारी पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है और जगदलपुर में पदस्थ है। इसी आधार पर जिला स्तरीय अनुकंपा नियुक्ति समिति ने आवेदन निरस्त कर दिया था।

अलग रहने और NOC का तर्क भी नहीं माना गया
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वीरेंद्र बहादुर रंगारी वर्ष 2006 से परिवार से अलग रह रहा है, मृतक पर आश्रित नहीं था तथा उसने हेनरी के पक्ष में अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी दिया है। साथ ही परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
वहीं राज्य शासन की ओर से कहा गया कि अनुकंपा नियुक्ति नीति स्पष्ट है। यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है, तो दूसरे सदस्य को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता।

अदालत बोली- नीति में नया प्रावधान नहीं जोड़ सकते
हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति नीति-2013 के क्लॉज 6(ए) का हवाला देते हुए कहा कि नीति में ऐसी कोई छूट नहीं है कि सरकारी नौकरी में कार्यरत सदस्य परिवार से अलग रह रहा हो या आर्थिक सहायता नहीं दे रहा हो तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जा सके।
अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय सहानुभूति के आधार पर नीति में नए प्रावधान जोड़कर किसी को राहत नहीं दे सकता। अनुकंपा नियुक्ति सामान्य भर्ती प्रक्रिया का विकल्प नहीं है, बल्कि सीमित दायरे में दी जाने वाली विशेष राहत है।

भविष्य के मामलों के लिए महत्वपूर्ण नजीर
डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा। माना जा रहा है कि यह फैसला भविष्य में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण नजीर साबित होगा। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे मामलों में निर्णय केवल निर्धारित नीति और नियमों के आधार पर ही होगा, न कि व्यक्तिगत परिस्थितियों या सहानुभूति के आधार पर।






































