BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को “डिजिटल अरेस्ट” और टेरर फंडिंग के नाम पर डरा-धमकाकर 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के दो और सदस्यों को बिलासपुर पुलिस ने महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी रिश्ते में पिता-पुत्र हैं, जो साइबर अपराधियों को कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी नेपाल के काठमांडू तक जाकर साइबर ठगों के नेटवर्क को भारतीय बैंक खाते मुहैया करा चुके हैं।

सिटी कोतवाली पुलिस और रेंज साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में महाराष्ट्र के भंडारा जिले के वरठी थाना क्षेत्र से मोहम्मद नेमतउल्लाह मंसूरी (25) और उसके पिता अब्दुल कयूम अंसारी (47) को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, तकनीकी जांच और बैंक खातों के एनालिसिस के बाद आरोपियों की पहचान हुई और विशेष टीम ने दबिश देकर दोनों को पकड़ा।

2 फीसदी कमीशन के लालच में बन गए साइबर गिरोह का हिस्सा
पूछताछ में आरोपी नेमतउल्लाह मंसूरी ने स्वीकार किया कि वह महज 2 प्रतिशत कमीशन के बदले अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते साइबर अपराधियों को इस्तेमाल के लिए देता था। इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड और शेयर ट्रेडिंग स्कैम जैसे अपराधों में किया जा रहा था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी नेपाल के काठमांडू जाकर अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क को म्युल अकाउंट उपलब्ध करा चुका है। इस काम में उसका पिता भी सक्रिय रूप से शामिल था और मुख्य सरगनाओं के संपर्क में रहता था।

एक खाते में आए थे 54.40 लाख रुपये
पुलिस के अनुसार, रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से ठगी गई रकम में से 54 लाख 40 हजार रुपये आरोपियों के एक बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे। बाद में मुख्य मास्टरमाइंड ने रकम निकाल ली, जबकि आरोपियों को उनका तय कमीशन दे दिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, चेकबुक और संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं।

डर, धमकी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खेल
शिकायत के मुताबिक, ठगों ने महिला प्रोफेसर को व्हाट्सएप मैसेज और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क कर खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का वरिष्ठ अधिकारी बताया। महिला को यह कहकर डराया गया कि उनका नाम टेरर फंडिंग से जुड़ गया है और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने वाला है। इसके बाद कथित “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर कई दिनों तक मानसिक दबाव बनाकर अलग-अलग खातों में कुल 1.04 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
म्युल अकाउंट्स पर पुलिस की पैनी नजर
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी कभी भी अपने असली बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि लालच या कमीशन देकर दूसरों के खाते इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें ‘म्युल अकाउंट’ कहा जाता है। बिलासपुर पुलिस अब ऐसे खाताधारकों की पहचान कर रही है, जिन्होंने अपने खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए हैं। ऐसे लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

साइबर सेल की अपील: डरें नहीं, सतर्क रहें
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज में खुद को सीबीआई, पुलिस, ईडी या अन्य एजेंसी बताकर डराने वालों पर भरोसा न करें। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। बैंक डिटेल, ओटीपी या निजी जानकारी किसी से साझा न करें और साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर सेल से संपर्क करें।



































