BILASPUR NEWS. बिलासपुर शहर में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगों ने एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए की ऑनलाइन ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें आतंकी फंडिंग में शामिल होने का झूठा डर दिखाया और लगातार वीडियो कॉल के जरिए मानसिक रूप से दबाव बनाकर रकम ट्रांसफर करा ली।

पीड़िता रमन श्रीवास्तव, जो वर्ष 2005 में डीपी विप्र कॉलेज से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुई थीं, वर्तमान में बिलासपुर के सिविल लाइन क्षेत्र में रहती हैं। घटना 20 अप्रैल 2026 की है, जब उन्हें व्हाट्सएप पर “संजय PSI” नाम से एक मैसेज मिला। इसके बाद वीडियो कॉल कर ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनका नाम टेरर फंडिंग केस में जुड़ा है।

ठगों ने बार-बार वीडियो कॉल कर निगरानी का झूठा दावा किया। परिवार और बैंक डिटेल्स जुटाईं, करीब 2 घंटे 16 मिनट तक मानसिक दबाव बनाया। फिर धमकी दी कि बात बाहर बताने पर परिवार भी फंस जाएगा। इस डर के माहौल में पीड़िता को लगा कि वे सच में कानूनी गिरफ्त में हैं। डर के चलते पीड़िता ने पहले 20.20 लाख रुपए RTGS से ट्रांसफर किए। इसके बाद अलग-अलग खातों में रकम भेजते हुए कुल 1.04 करोड़ रुपए जमा करा दिए। ठगों ने इसके बाद 50 लाख रुपए और मांगे।

जब ठगों के कहने पर पीड़िता ने अपने बेटे प्रशांत श्रीवास्तव से 50 लाख रुपए मांगे, तब शक हुआ। बेटे ने तुरंत बिलासपुर पहुंचकर स्थिति समझी और बताया कि यह साइबर फ्रॉड है। शिकायत के आधार पर रेंज साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं 66C, 66D, 308, 318 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
- ठग खुद को पुलिस/CBI/ED अधिकारी बताते हैं।
- वीडियो कॉल पर नकली केस दिखाकर डराते हैं।
- कहते हैं कि आप “ऑनलाइन निगरानी” में हैं।
- गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

ऐसे रहें सावधान
- कोई भी पुलिस या एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती।
- डराने-धमकाने वाले कॉल तुरंत काटें।
- बैंक डिटेल्स या OTP किसी से शेयर न करें।
- ऐसे मामलों में तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें।




































