JOB NEWS. फौज में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (SSB) अब एक नए बदलाव के दौर से गुजरने जा रहा है। इस साल के आखिर से SSB का पहला चरण कंप्यूटर आधारित (Computer-Based Test) किया जाएगा। इसका उद्देश्य चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और निष्पक्ष बनाना है। SSB में अब तक पारंपरिक तरीके से स्क्रीनिंग और टेस्ट होते थे, लेकिन तकनीक के इस्तेमाल से रिजल्ट प्रोसेसिंग और मूल्यांकन को ज्यादा सटीक और ऑटोमेटेड बनाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है।

अब तक टेक्निकल ग्रेजुएट्स को उनकी इंजीनियरिंग डिग्री में मिले अंकों के आधार पर सीधे SSB के लिए बुलाया जाता था। लेकिन अगले साल से यह व्यवस्था बदलने जा रही है। अब टेक्निकल एंट्री के लिए भी उम्मीदवारों को एक नए एंट्रेस एग्जाम से गुजरना होगा, जिसे UPSC CDSTE के नाम से आयोजित किया जाएगा। यह परीक्षा परमानेंट कमीशन और शॉर्ट सर्विस कमीशन—दोनों के लिए अनिवार्य होगी।

इस बदलाव के बाद टेक्निकल उम्मीदवारों के लिए चयन प्रक्रिया CDS और NDA की तरह अधिक प्रतिस्पर्धी और मानकीकृत हो जाएगी। SSB चयन प्रक्रिया में बदलाव की एक बड़ी वजह सामने आई थी—इंजीनियरिंग कॉलेजों में मार्किंग सिस्टम का अंतर। देखा गया कि कई प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में अधिक अंक दिए जाते हैं, जिससे उनके छात्रों का कटऑफ ज्यादा बन जाता है। इसके कारण SSB में बुलाए जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन चयनित उम्मीदवारों का अनुपात कम रह जाता है।

इस समस्या को लेकर भारतीय सेना के रिक्रूटमेंट डायरेक्टरेट ने रिटायर्ड मेजर जनरल वीपीएस भाकुनी (VPS Bhakuni) को भेजे गए पत्र में भी चिंता जताई थी कि SSB सेंटर पर भीड़ बढ़ रही है और स्क्रीन आउट होने वालों की संख्या ज्यादा है। नई प्रक्रिया में NCC के ‘C’ सर्टिफिकेट रखने वाले उम्मीदवारों को बोनस मार्क्स देने का प्रावधान जोड़ा गया है। इससे NCC कैडेट्स को चयन प्रक्रिया में अतिरिक्त बढ़त मिलेगी।

इसके अलावा टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES) में भी NDA की तर्ज पर एंट्रेस टेस्ट जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। अभी तक TES के लिए JEE रैंक के आधार पर उम्मीदवारों को SSB के लिए बुलाया जाता है। SSB प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए बड़े स्तर पर ऑटोमेशन लागू किया जा रहा है। उम्मीदवारों के मूल्यांकन के लिए टैबलेट और अन्य डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल का ट्रायल किया जा चुका है।

रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया को भी तेजी से डिजिटल किया जा रहा है, जिससे समय की बचत होगी और मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी। इन बदलावों के बाद सेना में अधिकारी बनने की राह पहले से ज्यादा संरचित और प्रतिस्पर्धी हो जाएगी। अब केवल अकादमिक अंकों के बजाय एक मानकीकृत परीक्षा और डिजिटल मूल्यांकन के आधार पर चयन होगा।






























