MUNGELI NEWS. बेहतर भविष्य की नींव मजबूत प्राथमिक शिक्षा से ही रखी जाती है, लेकिन जब स्कूल में शिक्षक ही न हों तो बच्चों का भविष्य अंधकार में जाना तय है। ऐसा ही चिंताजनक मामला मुंगेली जिले के ग्राम पंचायत सुरदा से सामने आया है, जहां प्राथमिक शाला में शिक्षकों की भारी कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

ग्राम सुरदा के प्राथमिक विद्यालय में वर्तमान में केवल एक ही शिक्षक पदस्थ है, जो सभी कक्षाओं और विषयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

9 महीने पहले निरस्त हुआ संलग्नीकरण, फिर भी नहीं लौटे प्रधानपाठक
विद्यालय के प्रधानपाठक संजय उपाध्याय पिछले तीन वर्षों से शासकीय स्कूल करही में संलग्न हैं, जबकि उनका मूल पदस्थापन प्राथमिक शाला सुरदा में है। खास बात यह है कि लगभग 9 महीने पहले ही उनका संलग्नीकरण निरस्त कर उन्हें मूल स्कूल में लौटने का आदेश जारी किया जा चुका है।

बीईओ द्वारा 26 जुलाई 2025 को उन्हें कार्यमुक्त कर सुरदा में ज्वाइन करने के निर्देश दिए गए, लेकिन इसके बावजूद वे अब तक स्कूल नहीं पहुंचे हैं।
कलेक्टर के आदेश का भी नहीं हुआ पालन
ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर पिछले वर्ष जून से ही कलेक्टर जनदर्शन में लगातार शिकायतें की हैं। कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों के आदेशों का पालन न होना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

3 दिन का अल्टीमेटम, फिर ताला और घेराव
समस्या से त्रस्त ग्रामीणों और सरपंच ने 7 अप्रैल को फिर जनदर्शन में आवेदन देकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 3 दिनों के भीतर प्रधानपाठक स्कूल में उपस्थित नहीं होते हैं, तो वे स्कूल में ताला जड़कर कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।
संलग्नीकरण खत्म करने के आदेश बेअसर
राज्य शासन ने पहले ही शिक्षकों के संलग्नीकरण को समाप्त करने के निर्देश दिए हैं, ताकि स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके बावजूद जिले में आदेशों की अनदेखी कर शिक्षकों को अन्यत्र संलग्न रखा जा रहा है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का सवाल: आखिर कब सुधरेगी व्यवस्था?
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद जब समाधान नहीं निकल रहा, तो आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचता है। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर ग्रामीणों को स्कूल में ताला लगाकर कलेक्ट्रेट घेराव करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।




































