BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में एक और शेर की मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार बिलासपुर के कानन पेंडारी जू में सफेद शेर आकाश की मौत हो गई। इसके बाद चिड़ियाघर प्रबंधन ने शव का पोस्ट मार्टम किया गया, जिससे पता चला कि आकाश की मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई है। इससे अब प्रदेश में तीन शेर ही बचे हैं। पीएम के बाद आकाश का अंतिम संस्कार किया गया।

जानकारी के अनुसार पिंजड़े की सफाई के लिए पहुंचे जू कीपर ने पानी डाला तो आकाश के शरीर में किसी तरह की हलचल नहीं हुई। उसने तत्काल इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी। इस पर कानन के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. पीके चंदन पहुंचे. जांच के बाद उन्होंने शेर को मृत घोषित कर दिया।
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शेर की मौत की वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें हार्ट अटैक की पुष्टि हुई। इसके बाद मृत बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। सफेद शेर आकाश जू में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। बता दें कि आकाश की मौत से कानन पेंडारी चिड़ियाघर में वर्तमान में सफेद शेरों की संख्या फिर से तीन हो गई है।

हाल ही में ग्वालियर जू से एक नया सफेद शेर लाया गया था, जिससे कुल संख्या चार हो गई थी. लेकिन अब आकाश की मौत से संख्या फिर से तीन पर पहुंच गई है। गौरतबल है कि कानन पेंडारी चिड़ियाघर लगभग 114.636 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है. यहाँ लगभग 70 प्रजातियों के वन्यजीव हैं, जिनमें सफेद बाघ, रॉयल बंगाल टाइगर, शेर, तेंदुआ, दरियाई घोड़ा, गैंडा, भालू, हिरण, इमू, शाही, विभिन्न पक्षी, मछलियाँ और सर्प शामिल हैं।

बता दें कि एक दिन पहले बागबाहरा वन परिक्षेत्र के खल्लारी जंगल में ह कुछ ग्रामीणों ने एक तेंदुआ और एक बायसन के शव देखकर वन विभाग को जानकारी दी। मिली जानकारी के अनुसार बागबाहरा वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 182 में श्रेणी 01 के दो वन्य प्राणियों के शव देखे गए।

प्रथम दृष्टया दोनों वन्य प्राणी तेंदुआ एवं बायसन की मौत करंट तार से चिपकने के कारण हुई होगी। घटना की सूचना के बाद बागबाहरा रेंजर अपने स्टाफ के साथ मौके पर पहुंच चुके हैं, जबकि वन मण्डलाधिकारी भी घटनास्थल पहुंचने वाले हैं।
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छत्तीसगढ़ में इन दिनों वन विभाग की लापरवाही से लगातार जंगल जल रहे हैं, जिससे जंगल की तपिश से परेशान होकर भागते वन्य प्राणी शिकारियों के जाल में फंसकर मारे जा रहे हैं। जानकारों के अनुसार यह घटना इसलिए सामने आई कि इन वन्य प्राणियों को शिकारी भोजन नहीं बना सकते और न ही इनका मांस बिकता है। परन्तु चीतल का शिकार प्रतिदिन होने से भी उसकी जानकारी कभी बाहर नहीं आती।





































