BILASPUR NEWS. NEET-UG परीक्षा की OMR शीट में गड़बड़ी और अंकों में विसंगति का आरोप लगाने वाली सारंगढ़-बिलाईगढ़ की छात्रा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने NTA की ओर से पेश की गई मूल OMR शीट की जांच के बाद छात्रा की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि परीक्षा में अभ्यर्थी द्वारा दर्ज किए गए उत्तरों का अंतिम और विश्वसनीय रिकॉर्ड मूल OMR शीट ही है।

मामला 21 वर्षीय छात्रा पीहू सिंह से जुड़ा है। छात्रा ने 21 जून 2026 को NEET-UG परीक्षा दी थी। परीक्षा परिणाम में उसे 159 अंक मिले। छात्रा ने अपने अंकों में विसंगति बताते हुए OMR शीट में छेड़छाड़ की आशंका जताई और हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

कोर्ट के निर्देश पर NTA के डिप्टी डायरेक्टर अनिल धीमान ने 10 अगस्त को छात्रा की मूल OMR शीट न्यायालय के समक्ष पेश की।
180 में सिर्फ 71 प्रश्न किए थे अटेम्प्ट
मूल OMR शीट की जांच के दौरान कोर्ट ने पाया कि छात्रा ने कुल 180 प्रश्नों में से केवल 71 प्रश्नों के उत्तर OMR पर दर्ज किए थे। इनमें 46 उत्तर सही और 25 उत्तर गलत पाए गए। इसी आधार पर छात्रा को मिले 159 अंक सही पाए गए।

टेस्ट बुकलेट नहीं, OMR मानी जाएगी अंतिम
हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल यह दावा करना कि अभ्यर्थी ने परीक्षा में अधिक प्रश्न हल किए थे, OMR शीट में दर्ज उत्तरों को बदलने या उन्हें गलत ठहराने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टेस्ट बुकलेट में किए गए मार्किंग को मूल OMR शीट का विकल्प नहीं माना जा सकता।

अदालत ने साफ कर दिया कि NEET जैसी परीक्षा में अभ्यर्थी के वास्तविक दर्ज उत्तरों का अंतिम रिकॉर्ड मूल OMR शीट ही होगी। इसके आधार पर छात्रा की याचिका खारिज कर दी गई।






































