BILASPUR NEWS. शहरों में फुटपाथ पर कब्जे और सड़कों पर बेतरतीब पार्किंग की समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि फुटपाथ पर सुरक्षित पैदल चलना नागरिकों का संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को शपथपत्र के जरिए यह बताने का निर्देश दिया है कि शहर के फुटपाथों को अतिक्रमण और अवैध पार्किंग से मुक्त रखने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता संस्कार राजपूत की ओर से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि शहर के कई इलाकों में फुटपाथों पर दुकानदारों और अन्य लोगों का कब्जा है। वहीं, बेतरतीब पार्किंग के कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है। इससे बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है।
याचिका में कहा गया कि प्रशासन से कई बार शिकायत करने के साथ ही RTI के माध्यम से भी जानकारी मांगी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

67 हजार से ज्यादा चालान का दावा, तस्वीरों ने खोली पोल
सुनवाई के दौरान नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की ओर से बताया गया कि अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने वर्ष 2024 में 67 हजार से अधिक चालान काटे जाने की जानकारी भी कोर्ट के सामने रखी।

हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए हालिया फोटोग्राफ्स और मीडिया रिपोर्ट्स ने प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। तस्वीरों में कई जगह फुटपाथ पर दुकानें, ठेले और बेतरतीब खड़े वाहन नजर आए। इससे कोर्ट के सामने यह स्थिति स्पष्ट हुई कि कार्रवाई के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर पैदल राहगीरों की परेशानी बरकरार है।

पार्किंग की स्थायी नीति पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने शहर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने पाया कि पार्किंग की समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस और दीर्घकालिक नीति प्रभावी रूप से लागू होती नजर नहीं आ रही है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
नगर निगम आयुक्त को अब शपथपत्र के माध्यम से फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने और पैदल राहगीरों के अधिकार की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।






































