JAGDALPUR NEWS. देशभर में धर्मांतरित परिवारों को अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण से बाहर करने की मांग अब तेज होती नजर आ रही है। इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सातों जिलों से करीब 1200 आदिवासी ग्रामीण दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। 24 मई को राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर डी-लिस्टिंग की मांग उठाई जाएगी।

सर्व आदिवासी समाज के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने दावा किया है कि इस आंदोलन में देशभर से लगभग 5 लाख आदिवासी शामिल हो रहे हैं। उनका कहना है कि धर्मांतरण के बाद भी कई परिवार सरकारी आरक्षण और योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, जबकि उन्हें मिशनरियों से भी सहायता मिल रही है।

अरविंद नेताम ने बस्तर में बढ़ते धर्मांतरण को नक्सलवाद के बाद सबसे बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी समाज की परंपराएं, संस्कृति और सामाजिक संरचना प्रभावित हो रही है। उनके मुताबिक गांव-गांव में प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और कई जगह अवैध रूप से चर्च संचालित किए जा रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर अब धर्मांतरित परिवारों को ST और SC सूची से बाहर करने की मांग जोर पकड़ रही है। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से अरविंद नेताम दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इस विषय में हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।






































