RAIBARELI NEWS. कांग्रेस सांसद ने रायबरेली और अमेठी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए ऐसा बयान दिया, जिससे देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राहुल गांधी के गद्दार वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा पलटवार करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना और अराजक राजनीति करार दिया है।
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद अपने सातवें दौरे पर रायबरेली पहुंचे राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब आरएसएस के कार्यकर्ता सामने आएं तो उनसे खुलकर कहें कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और संगठन ने देश को बेचने का काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश गंभीर आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में बड़ा आर्थिक तूफान देखने को मिल सकता है।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि देश में रोजगार और छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं, जबकि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटका रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कठिन हालात आने पर सरकार को जनता के सामने जवाब देना पड़ेगा।

अमेठी में मोदी-मेलोनी पर तंज
रायबरेली के बाद अमेठी पहुंचे राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और सोशल मीडिया उपस्थिति को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश में छोटे कारोबार बंद हो रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री इटली की प्रधानमंत्री के साथ रील और तस्वीरों में व्यस्त दिखाई देते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर मजबूत ढांचा खड़ा करने में विफल रही है और जनता का ध्यान भटकाने के लिए प्रचार-प्रधान राजनीति की जा रही है। अमेठी प्रवास के दौरान राहुल गांधी ने स्थानीय अस्पताल पहुंचकर मरीजों से मुलाकात भी की और उनका हालचाल जाना।

भाजपा का पलटवार
राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेता ने कहा कि राहुल गांधी का बयान उनकी “अराजकतावादी मानसिकता” को दर्शाता है और उन्हें भारतीय राजनीति का “राहु” बताया।
वहीं, ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें “रिजेक्टेड माल” कहा। केंद्रीय मंत्री ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता से दूर रहने की निराशा राहुल गांधी के बयानों में साफ दिखाई देती है।

बयानबाजी से गरमाई सियासत
राहुल गांधी के बयान ने एक बार फिर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। कांग्रेस जहां इसे सरकार के खिलाफ आक्रामक राजनीतिक हमला बता रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बयान करार देकर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।





































