KOLKATA NEWS. पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने कार्यभार संभालते ही पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के कई बड़े फैसलों को पलटना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों को दिए जाने वाले मानदेय को आगामी 1 जून से पूरी तरह बंद करने का बड़ा फैसला लिया गया है।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के ऐलान से कुछ घंटे पहले ही इस मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद पंजीकृत मस्जिदों के इमामों को 3000 रुपये तथा मुअज्जिन व पुजारियों को 2000 रुपये प्रति माह दिए जा रहे थे। सरकार का मानना है कि धर्म के आधार पर चलाई जा रही सहायता योजनाओं को बंद किया जाना चाहिए और इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।

महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना और मुफ्त बस सफर
कैबिनेट बैठक में तुष्टिकरण की राजनीति पर रोक लगाने के साथ ही जनहित और महिला कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई है। राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत हर महीने 3000 रुपये की वित्तीय सहायता देने और उनके लिए मुफ्त बस यात्रा शुरू करने का ऐतिहासिक ऐलान किया गया है।

इसके अलावा राज्य में सातवां वेतन आयोग गठित करने तथा ओबीसी (OBC) सूची में आवश्यक बदलाव करने जैसे अहम नीतिगत निर्णय भी लिए गए हैं। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों की किसी भी छात्रवृत्ति योजना को बंद नहीं किया जाएगा।

भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न की जांच करेंगे रिटायर्ड जज
पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न के मामलों पर नकेल कसने के लिए सुवेंदु सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। कैबिनेट ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए 2 अलग-अलग जांच आयोग गठित करने का निर्णय लिया है। इन दोनों ही आयोगों की अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त (Retired) न्यायाधीश करेंगे, ताकि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो सके।




































