BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। कोनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस ने एक ऐसे ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) का पर्दाफाश किया है, जिसका उपयोग देश के विभिन्न हिस्सों में हुई साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए किया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने एक बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर को गिरफ्तार किया है, जिसने महज कुछ रुपयों के कमीशन के लालच में अपना खाता अपराधियों के हवाले कर दिया था।

पुलिस के अनुसार, भारत सरकार के पुलिस पोर्टल समन्वय (JMIS) के जरिए बिलासपुर पुलिस को आईडीबीआई (IDBI) बैंक के एक संदिग्ध खाते के बारे में इनपुट प्राप्त हुआ था। जब पुलिस की तकनीकी टीम ने इस खाते के रिकॉर्ड खंगाले, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इस अकेले खाते के विरुद्ध देश के 10 अलग-अलग राज्यों में पहले से ही साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज थीं।

जनवरी में खुला था खाता, लाखों का हुआ लेनदेन
जांच में पता चला कि आरोपी संजय साहू ने इसी साल 20 जनवरी 2026 को आईडीबीआई बैंक में अपना खाता खुलवाया था। खाता खुलते ही इसमें देश के विभिन्न राज्यों से लाखों रुपयों का संदिग्ध लेनदेन शुरू हो गया। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात साफ हुई है कि संजय ने साइबर ठगों के साथ मिलकर यह खाता तैयार करवाया था।

यूपीआई और एटीएम का शातिर इस्तेमाल
ठगी के इस खेल में अपराधी बेहद चालाकी बरत रहे थे। जैसे ही ठगी की रकम संजय के खाते में आती, उसे तुरंत यूपीआई (UPI) या एटीएम (ATM) के माध्यम से निकाल लिया जाता था या दूसरे अज्ञात खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों की मेहनत की कमाई को गायब करना और अपराध की कड़ियों को उलझाना था।

पुलिस की कार्रवाई और चेतावनी
बिलासपुर पुलिस ने आरोपी संजय साहू के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर या कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। आपका खाता किसी बड़े अपराध का माध्यम बन सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी खाताधारक की होती है।



































