Raipur News रायपुर। राजधानी की सड़कों पर बेतरतीब तरीके से घूम रहे ई-रिक्शा ट्रैफिक सिस्टम को पूरी तरह बिगाड़ रहे हैं। सिग्नल तोड़ना, चौराहों पर गाड़ियां रोककर सवारी चढ़ाना-उतारना और बिना किसी निर्धारित स्थान के खड़े रहना आम बात हो गई है। जिससे ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है।
Raipur News सबसे ज्यादा समस्या इन इलाकों में देखी जा रही है- स्टेशन चौक, फाफाडीह चौक, अंबेडकर अस्पताल चौक, जयस्तंभ चौक, आमापारा, लोधीपारा, अवंति बाई चौक, कलेक्टोरेट चौक, कपड़ा मार्केट चौक, कालीबाड़ी और पचपेड़ी नाका। पुलिस की तैनाती के बावजूद ई-रिक्शा चालक बीच सड़क पर ही यात्री चढ़ाते-उतारते नजर आते हैं। इनके लिए कोई स्टैंड या पार्किंग स्थल निर्धारित नहीं है, जिसके कारण ई-रिक्शा बेतरतीब तरीके से सड़क किनारे खड़े रहते हैं। जब उन्हें समझाने की कोशिश की जाती है तो कई चालक अभद्रता और गाली-गलौज पर उतर आते हैं।
पुलिस का दावा- कार्रवाई हो रही है, लेकिन तकनीकी दिक्कत बाधा
Raipur News पुलिस का कहना है कि ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। लेकिन ग्रीन नंबर प्लेट वाले वाहनों को ट्रैफिक कैमरों में साफ-साफ कैद नहीं किया जा पाता, जिससे ई-चालान जारी करने में दिक्कत आती है। ऐसे में पुलिस को मौके पर फोटो खींचकर ही कार्रवाई करनी पड़ रही है।
कोई रूट प्लानिंग नहीं, न परमिट की बाध्यता
राजधानी में ई-रिक्शा संचालन को लेकर अब तक कोई ठोस नीति या रूट प्लान तैयार नहीं किया गया है। नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस और आरटीओ के बीच समन्वय की कमी के कारण न तो रूट निर्धारित हुए हैं और न ही परमिट की कोई अनिवार्यता रखी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के नाम पर बिना किसी नियंत्रण के बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बेचे जा रहे हैं। एक व्यक्ति के नाम पर कई ई-रिक्शा चल रहे हैं, जिन्हें किराए पर दिया जाता है। शहर में कितने ई-रिक्शों की जरूरत है, किन रूटों पर कितनी गाड़ियां चलनी चाहिए और कहां उनके स्टॉपेज पॉइंट होंगे- इन सवालों पर न कोई सर्वे हुआ है और न ही कोई योजना बनी है।
Raipur News पुलिस का प्रस्ताव कागजों में सिमट गया
ई-रिक्शा व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस ने पहले ही एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन को सौंप दिया था। प्रस्ताव में शहर को चार जोनों में बांटकर प्रत्येक जोन में ई-रिक्शा का संतुलित वितरण करने और निश्चित रूट तय करने की सिफारिश की गई थी।

Raipur News इससे न सिर्फ सड़कों पर ट्रैफिक दबाव कम होता, बल्कि लोग निजी वाहनों की बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करते। लेकिन अफसोस की बात है कि यह प्रस्ताव अब तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित है, अमल नहीं हो पाया है।



































