RAIPUR NEWS. रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले के बाद मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने इसे न्याय की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि 23 साल के लंबे इंतजार के बाद परिवार को इंसाफ मिला है। सतीश जग्गी ने कहा कि इस पूरे समय उन्हें न केवल कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी, बल्कि राजनीतिक दबाव और पैसों की ताकत का भी सामना करना पड़ा। बेटे सतीश जग्गी का कहना है कि यह फैसला उनके संघर्ष और धैर्य का नतीजा है। उन्होंने मांग की कि दोषी को और कड़ी सजा दी जानी चाहिए और उसका पासपोर्ट भी जब्त किया जाए।

बता दें कि यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो बाद में सरकारी गवाह बन गए। 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को सजा मिली थी।


इसके खिलाफ सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला फिर से हाईकोर्ट में सुना गया। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को हत्या (धारा 302) और आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) का दोषी ठहराया है और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि एक जैसे साक्ष्यों के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना न्यायसंगत नहीं है। इस फैसले के बाद जहां एक ओर परिवार ने राहत महसूस की है, वहीं सतीश जग्गी ने सजा को और सख्त करने की मांग भी दोहराई है।





































