RAIPUR NEWS. कम मानदेय और बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ सड़कों पर उतरीं मिड-डे मील रसोइयों का आंदोलन अब त्रासदी में बदलने लगा है। छत्तीसगढ़ में मिड-डे मील योजना के तहत सरकारी स्कूलों में कार्यरत रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच दो महिलाओं की मौत हो गई है। पहली घटना बेमेतरा जिले की है, जहां शासकीय प्राथमिक शाला सलधा में पदस्थ रसोइया दुलारी यादव (पति परदेशी यादव) का मंगलवार को निधन हो गया। दुलारी 29 दिसंबर से रायपुर के तूता धरना स्थल पर आंदोलन में शामिल थीं।

25 जनवरी को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेकाहारा ले जाया गया, बाद में परिजन भिलाई के एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसी तरह 26 जनवरी को बालोद जिले के डोंडी ब्लॉक के कुसुमकसा गांव निवासी रसोइया रूकमणि सिन्हा का भी निधन हो गया। रूकमणि भी 29 दिसंबर से हड़ताल में शामिल थीं। 20 जनवरी को तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें घर ले गए, इसके बाद 23 जनवरी को राजनांदगांव जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 जनवरी को उनकी मौत हो गई।

वहीं, कोंडागांव जिले के बाड़ागांव निवासी रसोइया तीजन बाई मरकाम की हालत भी गंभीर बताई जा रही है। रसोइया संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजराम कश्यप के अनुसार, प्रदेशभर में लगभग 86 हजार रसोइया कार्यरत हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं। ये सभी बीते करीब 30 दिनों से धरने पर बैठी हैं। संघ का कहना है कि जिन दो महिलाओं की मौत हुई है, उन्हें इन्फेक्शन, सर्दी-खांसी और सिरदर्द जैसी समस्याएं थीं, जो धरना स्थल पर अव्यवस्थाओं और ठंड से जुड़ी हो सकती हैं।

बता दें कि रसोइया अपनी दैनिक मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर 29 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। वर्तमान में उन्हें मात्र 66 रुपये प्रतिदिन मानदेय दिया जाता है, जो कलेक्टर दर से भी कम बताया जा रहा है। संघ का कहना है कि इतनी कम राशि में जीवन यापन संभव नहीं है। हड़ताल के चलते राज्य के हजारों सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।




































