BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। ग्रामीण इलाकों में दिनदहाड़े सूने मकानों को निशाना बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह में एक पूर्व स्कूल प्रिंसिपल भी शामिल था। आरोपी कथित तौर पर कृषि अधिकारी बनकर सर्वे करने के बहाने गांवों में घूमते और सूने मकानों की रेकी करते थे। मौका मिलते ही घरों के ताले तोड़कर जेवर और नकदी चोरी कर फरार हो जाते थे।
कोटा पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से सोने-चांदी के आभूषण, 1.30 लाख रुपये नकद और चोरी की रकम से खरीदे गए क्रेटा कार व बुलेट समेत करीब 19.81 लाख रुपये का सामान जब्त किया है। इस कार्रवाई में बिलासपुर जिले की नौ और कोरबा जिले की एक चोरी का खुलासा हुआ है।
कृषि अधिकारी बनकर करते थे सूने मकानों की रेकी
पुलिस के अनुसार, आरोपी ग्रामीणों के बीच सामान्य लोगों की तरह रहते और गांवों में घूमते थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो। वे कथित तौर पर कृषि अधिकारी बनकर सर्वे करने की बात कहते और इस दौरान उन मकानों पर नजर रखते, जहां ताला लगा होता था। ग्रामीणों के खेती-किसानी या दूसरे कामों से घर से बाहर जाने का फायदा उठाकर आरोपी वारदात को अंजाम देते थे। वे मकान का ताला तोड़कर अंदर घुसते और अलमारी व पेटियों में रखे गहने तथा नकदी समेटकर फरार हो जाते थे। बिलासपुर के कोटा, रतनपुर, बिल्हा, पचपेड़ी और बेलगहना चौकी क्षेत्र में दिन के समय हुई चोरी की घटनाओं की जांच के दौरान पुलिस को इस गिरोह के बारे में सुराग मिले।
जूते की दुकान चलाता था मास्टरमाइंड, पूर्व प्रिंसिपल भी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में कोरबा जिले के मानिकपुर क्षेत्र स्थित डिपरापारा निवासी विनोद कुमार वासुदेव (33), भूपेंद्र सिंह राठौर उर्फ गुरुजी (43) और राज प्रजापति उर्फ लल्लू (19) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, विनोद कुमार वासुदेव गिरोह का मास्टरमाइंड है। वह लोगों के सामने सामान्य कारोबारी की छवि बनाए रखने के लिए जूते-चप्पल की दुकान चलाता था। इसके अलावा जमीन की दलाली करने की बात भी सामने आई है। वहीं, भूपेंद्र सिंह राठौर पहले एक निजी स्कूल में प्रिंसिपल रह चुका है। बताया गया है कि वह नौकरी के दौरान विनोद के संपर्क में आया और फिर चोरी की वारदातों में शामिल हो गया। पुलिस के अनुसार, चोरी के मामले में पकड़े जाने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी थी। तीसरा आरोपी राज प्रजापति उर्फ लल्लू है। पुलिस के मुताबिक, उसे हाल ही में गिरोह में शामिल किया गया था और उसके खिलाफ पहले का आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग, चेहरा ढककर करते थे चोरी
ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज की। एसीसीयू और कोटा पुलिस की संयुक्त टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए हेलमेट पहनते और चेहरा ढककर रखते थे। पूछताछ के दौरान उन्होंने चोरी की वारदातों में शामिल होने की बात स्वीकार की।
चोरी के पैसों से खरीदी क्रेटा कार और बुलेट
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने चोरी की रकम से महंगे वाहन भी खरीदे थे। पुलिस के मुताबिक, विनोद कुमार वासुदेव ने चोरी के पैसों से सफेद रंग की क्रेटा कार खरीदी और उसकी किस्तें भी उसी रकम से चुकाईं। वहीं, राज प्रजापति ने चोरी की रकम से अपने चाचा के नाम पर बुलेट मोटरसाइकिल खरीदी थी। पुलिस ने क्रेटा कार, बुलेट और एक होंडा एसपी शाइन बाइक समेत वाहनों को जब्त किया है। इसके अलावा आरोपियों के कब्जे से करीब छह लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण, 1.30 लाख रुपये नकद और गुल्लक में रखे 1,250 रुपये के सिक्के भी बरामद किए गए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 19.81 लाख रुपये बताई गई है।
जांजगीर में भी दर्ज हैं चोरी के 19 मामले
पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों के खिलाफ जांजगीर जिले में वर्ष 2022-23 के दौरान दिन में चोरी से जुड़े 19 मामले दर्ज हुए थे। इन मामलों में आरोपी पहले भी जेल जा चुके हैं और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन बताए गए हैं। फिलहाल, पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 चोरी के मामलों का खुलासा किया है। पुलिस चोरी की रकम से खरीदी गई संपत्ति और आरोपियों की अन्य संभावित वारदातों की भी जांच कर रही है।




































