BIJAPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। सोमवार को कुल 35 लाख रुपये के इनामी 6 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए बीजापुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में ओडिशा में सक्रिय 4 माओवादी कैडर भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रभावित होकर इन कैडरों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
इस कार्रवाई में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) बीजापुर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की अहम भूमिका रही।
8-8 लाख के इनामी चार माओवादियों ने किया सरेंडर
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में चार ऐसे माओवादी कैडर शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष और कोसा माड़वी उर्फ सतीश के नाम शामिल हैं। ये सभी PPCM रैंक के माओवादी कैडर बताए गए हैं।
वहीं, देवे मड़कम उर्फ जन्नी पर 2 लाख रुपये और लालू ताती पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह छह माओवादी कैडरों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम था। इन सभी के आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
2012 से माओवादी संगठन में सक्रिय थी रानी सोढ़ी
पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाली रानी सोढ़ी उर्फ संध्या लंबे समय से माओवादी संगठन में सक्रिय थी। उसने वर्ष 2012 में बाल संघम सदस्य के रूप में संगठन में काम करना शुरू किया था। इसके बाद वह PLGA सदस्य और फिर पार्टी सदस्य के रूप में सक्रिय रही।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2022 में रानी सोढ़ी को PPCM की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 में सक्रिय थी। उसके आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
पुनर्वास नीति से मुख्यधारा में लौटने का मौका
पुलिस का कहना है कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों को सामान्य जीवन जीने का अवसर देना है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों को पुनर्वास और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
सुरक्षा बलों के लगातार नक्सल विरोधी अभियानों के साथ-साथ पुनर्वास योजनाओं को भी इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजापुर में छह माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण को इसी रणनीति की एक अहम सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
गृह मंत्री शाह ने छत्तीसगढ़ को घोषित किया था नक्सलमुक्त
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के बाद 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त घोषित कर दिया गया है। प्रदेश के सभी नक्सली क्षेत्रों से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो चुका है। प्रदेश के कई बड़े नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है और कई नक्सलियों ने सुरक्षाबलों की कार्रवाई को देखते हुए आत्मसमर्पण कर था।



































