RAIPUR NEWS. एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में, अदालत ने श्री कच्छ गुर्जर क्षत्रिय महासभा के आगामी चुनावों के परिणाम प्रकाशित करने पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश अर्यक दत्त (Aryak Dutt, J.) ने 9 अक्टूबर 2026 को सिविल रिविजनल एप्लीकेशन (C.O. 1348 of 2026) पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया है।

यह याचिका प्रफुल जेठालाल भाई चावड़ा (प्रफुल्ल कुमार जेठालाल) और अन्य द्वारा श्री कच्छ गुर्जर क्षत्रिय समाज/रमाज महासभा और अन्य के खिलाफ दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुद्धसत्व बनर्जी, औरिन चक्रवर्ती, सुमित बिस्वास और सुश्री राजश्री भौमिक ने पक्ष रखा।

क्या है पूरा मामला?
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, यह मूल विवाद (T.S. 1403 of 2023) घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा (permanent injunction) से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने सबसे पहले निचली अदालत में एकतरफा अंतरिम रोक (ad-interim ex parte injunction) की मांग की थी, जिसे 13 सितंबर 2023 को खारिज कर दिया गया था।

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपीलीय अदालत (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, 7वीं अदालत, अलीपुर, दक्षिण 24 परगना) में अपील की (Misc. Appeal No. 35 of 2024), लेकिन वहां भी 27 जनवरी 2026 को उनकी मांग खारिज कर दी गई और निचली अदालत को जल्द से जल्द अस्थायी निषेधाज्ञा का निपटारा करने का निर्देश दिया गया था। इसी 27 जनवरी 2026 के आदेश को याचिकाकर्ताओं ने इस वर्तमान याचिका (C.O. 1348 of 2026) में चुनौती दी थी।
कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अर्यक दत्त ने अलीपुर स्थित द्वितीय न्यायालय के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) से अनुरोध किया है कि वे लंबित इंजंक्शन एप्लीकेशन (T.S. 1403 of 2023) का निपटारा इस आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर करें।
अदालत ने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि महासभा के चुनाव अक्टूबर में होने तय हैं और इसके नतीजे 25 दिसंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने थे। कोर्ट ने अपने आदेश में सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि, “जब तक इस इंजंक्शन एप्लीकेशन (T.S. No. 1403 of 2023) का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक ऐसे चुनाव के परिणाम प्रकाशित नहीं किए जाएंगे”।
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इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने वर्तमान याचिका (C.O. 1348 of 2026) का निपटारा कर दिया है। अब महासभा और चुनाव से जुड़े सभी पक्षों की निगाहें अलीपुर कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर टिकी होंगी, जिसे दो महीने के भीतर फैसला लेना है।




































