BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की बहुचर्चित शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) नीति को जनहित में सही ठहराते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई यह नीति वैध है। इसी के साथ छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ समेत विभिन्न शिक्षकों द्वारा दायर 24 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।

जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को एक ही स्थान पर पदस्थ रहने का कानूनी या संवैधानिक अधिकार नहीं है। स्थानांतरण और पदस्थापना सरकार का प्रशासनिक अधिकार है और जब तक किसी नीति में दुर्भावना या स्पष्ट अवैधता साबित न हो, तब तक न्यायालय उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि युक्तियुक्तकरण से शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात प्रभावित होगा। साथ ही उन्होंने सरप्लस शिक्षकों की पहचान में वरिष्ठता की अनदेखी तथा आदेश राज्यपाल के नाम से जारी नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया था।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि युक्तियुक्तकरण का प्रस्ताव 9 जुलाई 2024 को कैबिनेट से मंजूर हुआ था और 16 जुलाई 2024 को विधिवत राज्यपाल के नाम से आदेश जारी किए गए थे। हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि अनुच्छेद 166 के उल्लंघन का आरोप निराधार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने के लिए कोई ठोस आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर सके कि नीति से छात्र-शिक्षक अनुपात प्रभावित हुआ है।

अदालत ने अपने फैसले में माना कि राज्य के कई ग्रामीण और दूरस्थ स्कूल शिक्षक विहीन या एकल-शिक्षकीय थे, जबकि कई शहरी स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक पदस्थ थे। ऐसी स्थिति में शिक्षा व्यवस्था में संतुलन स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा किया गया युक्तियुक्तकरण जनहित में उठाया गया उचित कदम है।

राज्य सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया के तहत 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। इसके माध्यम से 10,463 स्कूलों को शामिल किया गया, जिनमें 10,297 एक ही परिसर में संचालित विद्यालय भी शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य शिक्षक विहीन और एकल-शिक्षकीय स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है।





































