BILASPUR NEWS. बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र के ग्राम भाड़म में करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मीडिया में प्रकाशित समाचारों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस और जस्टिस की डिवीजन बेंच ने मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर सुनवाई शुरू कर दी है।

कोर्ट ने राज्य के ऊर्जा सचिव और CSPDCL के प्रबंध संचालक (MD) को व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए पूछा है कि बिजली लाइनों के रखरखाव, सुरक्षा और जवाबदेही की व्यवस्था आखिर कैसे संचालित की जा रही है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

खेत में करंट से गई थी तीन लोगों की जान
मामला बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र स्थित ग्राम भाड़म का है, जहां खेत में ट्यूबवेल के पास खुले और जर्जर बिजली तारों की चपेट में आने से पूर्व सरपंच दसन बाई तथा उनके दो बेटे विवेक और सत्यव्रत की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों ने बिजली विभाग की लापरवाही और जर्जर विद्युत लाइन के रखरखाव को हादसे के लिए जिम्मेदार बताया था।

कोर्ट ने मांगी पूरी जवाबदेही
-हाईकोर्ट ने ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनी से पूछा है कि—
-बिजली नेटवर्क के नियमित निरीक्षण और रखरखाव की वर्तमान व्यवस्था क्या है?
-ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं?
-लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की क्या प्रक्रिया है?
-क्या राज्य में विद्युत सुरक्षा को लेकर कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू है? यदि नहीं, तो उसे तैयार करने और लागू करने की समयबद्ध योजना क्या है?

अवैध बिजली फेंसिंग पर भी जताई गंभीर चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने खेतों, फार्म हाउस और मकानों की सुरक्षा के नाम पर अवैध विद्युत फेंसिंग लगाने की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसी फेंसिंग की चपेट में आने से न केवल लोगों की मौत हो रही है, बल्कि पालतू और वन्य जीव भी लगातार करंट का शिकार बन रहे हैं। अदालत ने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए स्पष्ट नीति और सख्त निगरानी की आवश्यकता है।

MD को बनाया पक्षकार, 23 जुलाई को फिर होगी सुनवाई
डिवीजन बेंच ने CSPDCL के प्रबंध संचालक को मामले में नया प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है। साथ ही रजिस्ट्री को आदेश दिया गया है कि सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना देकर आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाए। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई 2026 को होगी।





































