BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के तबादले और रिलीविंग को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि एक अनुसूचित क्षेत्र से दूसरे अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण होने पर विभाग कर्मचारी को ‘एवजी (प्रतिस्थानी) नहीं मिलने’ का हवाला देकर कार्यमुक्त नहीं रोक सकता। न्यायमूर्ति की एकल पीठ ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 20 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को कार्यमुक्त किया जाए।

मामला स्वास्थ्य विभाग के रेडियोग्राफर चंद्रशेखर मंडावी से जुड़ा है। वे नारायणपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा में पदस्थ थे। शासन ने 26 जून 2025 को उनका तबादला कांकेर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आमाबेड़ा कर दिया था, लेकिन उनकी जगह किसी अन्य कर्मचारी की पदस्थापना नहीं होने के कारण विभाग ने उन्हें एक वर्ष तक कार्यमुक्त नहीं किया।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने 7 जनवरी 2026 के परिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के पद खाली नहीं छोड़े जा सकते, इसलिए प्रतिस्थानी कर्मचारी के आने तक याचिकाकर्ता को रिलीव नहीं किया गया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने शासन के तर्क को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि संबंधित परिपत्र की यह शर्त केवल उस स्थिति में लागू होती है, जब किसी कर्मचारी का तबादला अनुसूचित क्षेत्र से गैर-अनुसूचित क्षेत्र में किया गया हो। यदि स्थानांतरण अनुसूचित क्षेत्र से दूसरे अनुसूचित क्षेत्र में हुआ है, तो इस आधार पर रिलीविंग रोकना नियमों की गलत व्याख्या है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ओरछा (नारायणपुर) और आमाबेड़ा (कांकेर) दोनों ही अनुसूचित क्षेत्र हैं। ऐसे में विभाग द्वारा कर्मचारी को कार्यमुक्त नहीं करना अनुचित है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 20 दिनों के भीतर स्थानांतरण आदेश का पालन करते हुए याचिकाकर्ता को कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए हैं।






































