BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सिम्स) की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। डिवीजन बेंच के समक्ष सिम्स प्रबंधन की ओर से प्रस्तुत AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार शपथ-पत्र पर मुख्य न्यायाधीश ने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा, “कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश न करें। यदि अस्पताल में सब कुछ ठीक होता तो यह मामला अदालत तक पहुंचता ही क्यों?”

सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नरों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें अस्पताल की गंभीर अव्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार सिम्स भवन में कई स्थानों पर छत से पानी टपक रहा है और हाल ही में बारिश के दौरान अस्पताल के विभिन्न हिस्सों में पानी भर गया, जिससे मरीजों और चिकित्सकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम भी लंबे समय से बंद मिला।

राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि फायर फाइटिंग सिस्टम की मरम्मत के लिए 15 जून 2026 को कार्यादेश जारी किया जा चुका है और काम प्रगति पर है।

सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने भी अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि सिम्स के लिए 31 आधुनिक चिकित्सा मशीनों की खरीदी प्रक्रिया जारी है। इनमें से 13 मशीनें अस्पताल पहुंच चुकी हैं, जबकि अन्य मशीनों के लिए खरीद प्रक्रिया विभिन्न चरणों में चल रही है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस जनहित याचिका का उद्देश्य किसी अधिकारी को दंडित करना नहीं, बल्कि सिम्स की स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार सुनिश्चित करना है। अदालत ने कोर्ट कमिश्नरों को बिना पूर्व सूचना अस्पताल का निरीक्षण कर सरकारी दावों का सत्यापन करने की अनुमति भी दी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि केवल कागजी दावे और शपथ-पत्र पर्याप्त नहीं हैं। जब अस्पताल में आने वाले गरीब मरीजों को समय पर आधुनिक मशीनों की सुविधा और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा, तभी व्यवस्था सुधार का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।





































