BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने संबंधी शासन के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि आदेश का स्कूलों में वास्तविक रूप से पालन कराया जा रहा है। ऐसे में फिलहाल न्यायिक हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

यह याचिका पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिज़वी की ओर से दायर की गई थी। याचिका में शासन के आदेश को संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. अमीर खान ने पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि केवल आदेश जारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी साबित होना चाहिए कि उसका वास्तविक क्रियान्वयन हो रहा है। चूंकि याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया, इसलिए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को भविष्य के लिए राहत का रास्ता भी खुला रखा है। कोर्ट ने कहा कि यदि आगे किसी स्कूल में आदेश के पालन के वीडियो, दस्तावेज या अन्य विश्वसनीय साक्ष्य सामने आते हैं, तो उन्हें रिकॉर्ड पर प्रस्तुत कर नई याचिका दायर की जा सकती है।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल राज्य सरकार के आदेश पर कानूनी रोक नहीं लगी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आदेश के क्रियान्वयन के ठोस प्रमाण मिलने पर मामले की दोबारा न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।






































